Friday, July 31, 2026
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पप्पू यादव का विरोध प्रतीकात्मक था, भाजपा ने आस्था के नाम पर लोगों को लूटा: सपा

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नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने शुक्रवार को राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद को लेकर भाजपा को घेरा। उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इन लोगों ने भगवान राम को लूट लिया है और बातें अपमान की कर रहे हैं। आखिर इन लोगों से बड़ा अपमान किसने किया है। इन्होंने सिर्फ भगवान राम का इस्तेमाल करके लोगों की आस्था को चोट पहुंचाने का काम किया है।

सपा सांसद के मुताबिक, अब ये लोग अपमान की बात कर रहे हैं। मैं पूछना चाहता हूं कि आखिर क्या अपमान हुआ है? रावण ने भी साधु का वस्त्र धारण करके मां सीता का अपहरण किया था। पप्पू यादव आज भगवा वस्त्र धारण करके यह दिखा रहे थे कि भाजपा कैसे लूट रही है। वो प्रतीकात्मक रूप से दिखा रहे थे कि कैसे जो पैसे उन्हें प्राप्त हो रहे थे, वो उसे अपनी जेब में रख रहे थे। पप्पू यादव ने भगवा वस्त्र इसलिए धारण किया था, क्योंकि भाजपा भी भगवा वस्त्र धारण करके लोगों को लूटने का काम करती है। इसी वजह से आम लोगों में रोष है।

उन्होंने कहा कि प्रतीकात्मक रूप से विरोध कर रहे पप्पू यादव जब दान पेटी को लेकर भाग रहे थे, तो समाजवादी पार्टी के लोगों ने उन्हें रोक लिया। उन्हें भागने नहीं दिया। पप्पू यादव प्रतीकात्मक रूप से यह दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि कैसे इन लोगों ने भगवान राम के नाम पर लोगों को लूटने का काम किया है। जब हमारी सरकार बनेगी, तो चढ़ावा चोरी के मामले में शामिल आरोपियों को सजा देंगे।

उधर, समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने केंद्र सरकार की ओर से अनवरत नए बिल पारित किए जाने पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बीजेपी की सरकार में आए दिन नए-नए बिल पेश किए जा रहे हैं। ऐसा करके सरकार आम जनता की दुश्वारियों को बढ़ाने की कोशिश कर रही है। इससे लोगों को आने वाले दिनों में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना होगा।

उन्होंने कहा कि अब सरकार की ओर से जन्म और मृत्यु के संबंध में विधेयक पेश किया गया। ऐसा करके सरकार ने आम जनता की समस्याओं को बढ़ाने का काम किया है। इससे आम लोगों को आने वाले दिनों में बहुत तरह की चुनौतियों का सामना करना होगा, लेकिन अफसोस की बात है कि सरकार का इस पर कोई ध्यान नहीं है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि सरकार आम जनता के हितों को लेकर पूरी तरह से बेपरवाह है। सपा ने इस बिल पर आपत्ति दर्ज कराते हुए बाकायदा चर्चा की भी मांग की थी। इस बिल पर किसी भी प्रकार की चर्चा नहीं की गई। इसे बेवजह पारित करवा दिया गया। इस तरह की स्थिति संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है।

वहीं, सपा सांसद लाल जी वर्मा ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा को लोकतंत्र के हितों से कोई लेना देना नहीं है। अगर होता तो आज इस तरह की स्थिति पैदा नहीं होती। मेरा यह मानना है कि भाजपा को लोकतंत्र पर विश्वास नहीं है। आज बहुत ही महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा हुई, जिसमें प्रमुख रूप से जन्म और मृत्यु के प्रावधानों जैसे बिंदुओं को शामिल किया गया था। इसके तहत आम जनता को सिर्फ एसडीएम तक ही अधिकार था, लेकिन इसके बाद भी आम लोगों को बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब अगर दो साल से अधिक होने के बावजूद भी किसी का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ, तो उसे एसडीएम की जगह पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा। इससे लोगों को अपना जन्म प्रमाणपत्र बनवाने में वर्षों लग जाएंगे।

पहले जो अधिकार एडीओ पंचायत को दिए गए थे, उसे अब एसडीएम को सौंप दिया गया है। इसका अर्थ हुआ कि एसडीएम के दफ्तर में भी जो लोग दो साल से अधिक हैं, उन्हें लंबी कतारों और जटिल प्रक्रियाओं का सामना करना होगा। इससे आगामी दिनों में देश की जनता को बहुत ही कठिनाइयों का सामना करना होगा।

सपा सांसद लाल जी वर्मा ने कहा कि बीजेपी ने इस बिल के जरिए एक तरह से अलोकतांत्रिक कदम उठाया था। इस बिल को लेकर बाकायदा मैंने संशोधन भी प्रस्तुत किया था। मैं संशोधन प्रस्तुत करने के लिए खड़ा था। लेकिन, मुझे संशोधन प्रस्तुत करने के लिए खड़ा नहीं होने दिया। इस तरह से मैं समझता हूं कि बीजेपी ने लोकतंत्र की हत्या करने की कोशिश की है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

वहीं, सपा सांसद राजीव राय ने भी विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी। उनके मुताबिक, बीजेपी को भगवान राम का नाम लेने का कोई नैतिक हक नहीं है। इन लोगों ने हमेशा से ही भगवान राम का इस्तेमाल सत्ता पाने के लिए किया है। मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि सत्ता पाने के बाद अंग्रेजों ने भी हमें नहीं लूटा था, जितना की इन बीजेपी वालों ने लूट किया है। अब इनकी कार्यशैली को लेकर देश के आम लोगों में आक्रोश बना हुआ है। ये लोग पप्पू यादव पर भगवान राम का अपमान करने का आरोप लगा रहे हैं और इनके शासनकाल में जिस तरह से राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की, क्या इससे भगवान राम का अपमान नहीं हुआ।