पश्चिम बंगाल चुनाव : अर्ध-शहरी सीट पर भाजपा की बड़ी सेंध, अभिनेत्री रूपा गांगुली को मिली ऐतिहासिक जीत

0
5

कोलकाता, 4 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले की वीआईपी और हाई-प्रोफाइल सोनारपुर दक्षिण विधानसभा सीट पर इस बार बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार और जानी-मानी अभिनेत्री रूपा गांगुली ने तृणमूल कांग्रेस के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को खत्म करते हुए शानदार जीत दर्ज की है।

चुनाव आयोग के नतीजों के अनुसार, रूपा गांगुली को कुल 1,28,970 वोट मिले और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 35,782 वोटों के बड़े अंतर से हराया। इस जीत के साथ ही भाजपा ने पहली बार इस सीट पर कब्जा जमाया है।

रूपा गांगुली भारतीय फिल्म और टेलीविजन जगत की एक प्रमुख हस्ती रही हैं। उन्होंने ‘महाभारत’ में द्रौपदी के अपने यादगार किरदार से देशभर में पहचान बनाई। इसके अलावा वे एक प्रतिभाशाली प्लेबैक सिंगर भी हैं और उन्हें 2011 में फिल्म ‘अबोशेषे’ के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिल चुका है।

सोनारपुर दक्षिण विधानसभा सीट (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 150) का गठन 2008 के परिसीमन के बाद हुआ था और 2011 से इस पर चुनाव हो रहे हैं। इस सीट पर अब तक तृणमूल कांग्रेस का ही कब्जा रहा था। 2011 और 2016 में जिबन मुखोपाध्याय ने यहां जीत दर्ज की, जबकि 2021 में अभिनेत्री और टीएमसी नेता लवली मोइत्रा (अरुंधति मोइत्रा) ने इस सीट पर जीत को बरकरार रखा था।

हालांकि, 2026 के चुनाव में भाजपा ने रूपा गांगुली जैसे बड़े और लोकप्रिय चेहरे को मैदान में उतारकर मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया। उनके व्यापक जनाधार और आक्रामक प्रचार अभियान ने मतदाताओं को प्रभावित किया और टीएमसी के मजबूत गढ़ में सेंध लगा दी।

यह सीट मुख्य रूप से एक अर्ध-शहरी क्षेत्र है, जहां तेजी से विकास हो रहा है। यहां शिक्षित बंगाली मध्यम वर्ग की बड़ी आबादी के साथ-साथ अनुसूचित जाति, खासकर पौंड्र और नामशूद्र समुदाय के मतदाताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। स्थानीय विकास, बुनियादी ढांचे में सुधार और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे इस चुनाव में प्रमुख रहे।

सोनारपुर दक्षिण विधानसभा सीट ‘जादवपुर’ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत है, जो कोलकाता से सटा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र है।

राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो 2011 में इस सीट के गठन के बाद से ही टीएमसी का यहां एकछत्र राज रहा था। परिसीमन से पहले यह क्षेत्र वाम मोर्चे, विशेषकर सीपीआई (एम), का गढ़ हुआ करता था।