नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने चुनाव आयोग (ईसीआई) की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केवल फोटो खिंचवाने या दिखावटी कार्यक्रम आयोजित करने से चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर लोगों की चिंताएं दूर नहीं हो सकतीं। एसआईआर को जिस तरह से तैयार, डिजाइन और लागू किया गया है, उस पर कई सवाल उठ रहे हैं।
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि एसआईआर को लेकर सवाल केवल सिविल सोसायटी या राजनीतिक दलों की ओर से ही नहीं उठाए जा रहे हैं, बल्कि चुनाव आयोग के भीतर से भी सवाल सामने आए हैं। यह एक व्यापक चिंता का विषय है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि मतदाता सूची में शामिल होने की प्रक्रिया समावेशी होनी चाहिए। उनके मुताबिक, 18 वर्ष से अधिक उम्र का प्रत्येक भारतीय नागरिक, जो संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का निवासी है, उसे मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराने का अधिकार होना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया का तरीका लोगों को मतदाता सूची से बाहर करने की दिशा में काम करता हुआ दिखाई देता है। कार्ति चिदंबरम ने कहा कि इससे पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के लिए मतदाता के तौर पर पंजीकरण कराना मुश्किल हो रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता, खासकर सत्तारूढ़ दल से जुड़े लोग, एक निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी संख्या में आपत्तियां या अपीलें दाखिल कर रहे हैं। इससे मतदाताओं के एक वर्ग को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने की आशंका पैदा होती है।
कार्ति चिदंबरम ने चुनाव आयोग से जुड़े संचार और जवाबदेही पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर पूरी प्रक्रिया आम सहमति से चल रही है, तो 14 ईमेल का जवाब क्यों नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि चुनाव आयोग में ऐसे अधिकारी भी हैं, जो मौजूदा कार्यप्रणाली को लेकर असहज महसूस कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की ओर से एसआईआर को लेकर कांग्रेस की चिंताओं पर दिए गए बयानों पर भी कार्ति चिदंबरम ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केवल कांग्रेस ही चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल नहीं उठा रही है।
उन्होंने कहा कि बिहार में भाजपा के सहयोगी दलों ने भी इस प्रक्रिया को लेकर सवाल और स्पष्टीकरण मांगे हैं। कार्ति चिदंबरम ने कहा कि अगर सहयोगी दलों, सिविल सोसाइटी और नागरिकों की ओर से भी सवाल उठ रहे हैं, तो उन्हें केवल विपक्ष की राजनीति कहकर खारिज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने मीडिया में प्रकाशित संपादकीय का भी हवाला दिया और कहा कि कई प्रमुख अखबारों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। क्या भाजपा का मानना है कि सभी अखबार गलत हैं।
कार्ति चिदंबरम ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग से सामने आ रहे डेटा को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आयोग के भीतर कुछ अधिकारी ऐसे हो सकते हैं, जो उसकी कार्यप्रणाली से असहज हैं। उन्होंने कहा कि इस गंभीर मुद्दे को केवल कांग्रेस पर आरोप लगाकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि बिहार में भाजपा के सहयोगी दलों की ओर से भी स्पष्टीकरण मांगे जाने के कारण यह कहना उचित नहीं होगा कि केवल विपक्षी दल ही सवाल उठा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “यह एक व्यापक समस्या है। सिविल सोसायटी चिंतित है, नागरिक चिंतित हैं और भाजपा को छोड़कर सभी राजनीतिक दल चिंतित हैं।” उन्होंने जोर दिया कि इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यूपीआई लेनदेन पर चार्ज लगाने से रोकने की मांग से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप से इनकार करने और केंद्र सरकार, आरबीआई तथा एनपीसीआई को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगने पर भी कार्ति चिदंबरम ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि यह सामान्य न्यायिक प्रक्रिया है और अगर सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करना शुरू करे तो उन्हें आश्चर्य होगा। हालांकि, उन्होंने यूपीआई पर भविष्य में शुल्क लगाए जाने की आशंका जताई। उन्होंने कहा कि अगर सरकार यूपीआई पर किसी तरह का टैक्स या चार्ज लगाना शुरू करती है, तो यह आगे चलकर अन्य प्रकार के लेनदेन पर भी शुल्क लगाए जाने की शुरुआत हो सकती है।
30 सितंबर को होने वाली इंडी गठबंधन के नेताओं की बैठक को लेकर कार्ति चिदंबरम ने कहा कि बैठक में सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे और विभिन्न मुद्दों पर खुलकर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी दल राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों के साथ-साथ जनता की चिंताओं से परिचित हैं और उन्हें उम्मीद है कि सभी जिम्मेदारी के साथ चर्चा करेंगे।
उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों का एक साथ आना सकारात्मक है। उनके मुताबिक, केवल विपक्षी दल ही चुनाव आयोग को लेकर सवाल नहीं उठा रहे हैं, बल्कि भाजपा के सहयोगी दल भी इस मुद्दे पर सवाल कर रहे हैं।
कार्ति चिदंबरम ने कहा कि आम लोगों के बीच भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चिंताएं सुनने को मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि एक मजबूत और कार्यशील लोकतंत्र के लिए चुनाव कराने वाली संस्था पर जनता का भरोसा होना जरूरी है। उनके मुताबिक यदि चुनाव कराने वाली संस्था ही सवालों के घेरे में हो, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर चिंताएं पैदा होना स्वाभाविक है।
