नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क सुरक्षा से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश में हाल ही में एक स्लीपर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत की घटना पर संज्ञान लिया। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, केंद्र सरकार और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को टूरिस्ट बसों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को उत्तर प्रदेश में स्लीपर बस में आग लगने की हालिया घटना के बारे में जानकारी दी। इस पर जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा कि स्लीपर बस में आग लगने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में नौ लोगों की जान जाने को देखते हुए कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से टूरिस्ट बसों की सुरक्षा को लेकर याचिका में उठाए गए मुद्दों पर जवाब मांगा। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि हादसे के बाद बस के ड्राइवर और मालिक के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है और क्या उन्हें गिरफ्तार किया गया है।
इसके अलावा ई-चालान जमा नहीं होने से जुड़े एक दूसरे मामले की सुनवाई के दौरान भी जस्टिस पारदीवाला ने यातायात नियमों को सख्ती से लागू करने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर केवल चालान काटना काफी नहीं है, बल्कि चालान की रकम की वसूली भी जरूरी है।
कोर्ट ने कहा कि हजारों या लाखों ई-चालान जारी किए जा सकते हैं, लेकिन अगर उनकी वसूली नहीं होती है तो उनका कोई मतलब नहीं रह जाता। सुनवाई के दौरान बताया गया कि करीब 45 हजार करोड़ रुपए के ई-चालान में से लगभग 25 हजार करोड़ रुपए ही जमा हुए हैं।
कोर्ट ने सुझाव दिया कि वाहन का प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) जारी करने से पहले यह जांच की जा सकती है कि उस वाहन के खिलाफ कोई चालान लंबित तो नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर औचक जांच करने और लंबित चालान वाले वाहनों को जब्त करने जैसे कदम उठाने की बात भी कही।
जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि अगर सख्ती के बावजूद लोग चालान की रकम जमा नहीं करते हैं तो इसे बिजली के बिल में जोड़कर भेजने जैसे विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है।
बता दें कि 24 सितंबर को ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर एक डबल डेकर स्लीपर बस में भीषण आग लगने की घटना के बाद बसों की सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में नौ यात्रियों की मौत की सूचना थी और कई लोग घायल हुए थे। जिस बस में आग लगी, उसके खिलाफ यातायात नियमों के उल्लंघन के 19 चालान लंबित बताए गए थे, जिनकी कुल रकम करीब 1.75 लाख रुपए थी। इसके बावजूद बस यात्रियों को लेकर एक्सप्रेसवे पर चलती रही।
बस के परमिट और सुरक्षा मानकों को लेकर भी सवाल उठे थे। जानकारी के अनुसार, बस का बिना वैध परमिट संचालन किए जाने को लेकर भी चालान किया गया था।
19 अगस्त को दिल्ली के मयूर विहार इलाके में बस का 18,500 रुपए का चालान हुआ था। इसमें बस की छत पर कथित रूप से अवैध तरीके से सामान ले जाने से जुड़ी कार्रवाई भी शामिल थी।
बस के पुराने चालानों में चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होने, तय यूनिफॉर्म नहीं पहनने और बिना परमिट संचालन जैसे उल्लंघन भी बताए गए थे। इसके बावजूद बस का लगातार संचालन होना प्रवर्तन व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
