नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। भारत के प्रख्यात संविधान विशेषज्ञ, पूर्व लोकसभा महासचिव और संसदीय मामलों के जानकार डॉ. सुभाष सी. कश्यप का गुरुवार को दिल्ली स्थित उनके आवास पर लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 97 वर्ष के थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. सुभाष सी. कश्यप के निधन से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि डॉ. कश्यप भारत के अग्रणी संवैधानिक विद्वानों में से एक थे, जिनके संसदीय और संवैधानिक विमर्श में योगदान ने समाज को समृद्ध बनाया। प्रधानमंत्री ने उनकी लेखनी और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का भी जिक्र किया। उन्होंने शोक संतप्त परिवार और मित्रों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए ‘ॐ शांति’ कहा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जताया। राष्ट्रपति ने कहा कि लोकसभा के पूर्व महासचिव एवं सुप्रसिद्ध संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष सी. कश्यप के निधन का समाचार बहुत दुखद है। उन्होंने हमारे संविधान के अध्ययन को तथा हमारी संसदीय प्रणाली के विकास को अपनी विद्वत्ता और अंतर्दृष्टि से समृद्ध किया है। मैं उनके परिवारजनों और प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं।
वहीं, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्ण ने भी शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि डॉ. सुभाष सी. कश्यप एक प्रतिष्ठित संवैधानिक विशेषज्ञ और विद्वान थे। उन्होंने अपनी पुस्तकों, शोध और सार्वजनिक सेवा के माध्यम से भारतीय संविधान और संसदीय लोकतंत्र की समझ को मजबूत करने में अमूल्य योगदान दिया। उनकी स्पष्ट सोच, बौद्धिक क्षमता और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति समर्पण ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया।
डॉ. सुभाष सी. कश्यप 1983 से 1990 तक लोकसभा के महासचिव रहे। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की पहली लोकसभा से लेकर नौवीं लोकसभा तक करीब 37 वर्षों तक संसद की सेवा की। वह 100 से अधिक पुस्तकों के लेखक थे और भारतीय संविधान तथा संसदीय प्रक्रियाओं के सबसे विश्वसनीय विशेषज्ञों में गिने जाते थे।
साल 1929 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर में स्वतंत्रता सेनानी परिवार में जन्मे डॉ. कश्यप ने इलाहाबाद, नई दिल्ली, वॉशिंगटन डीसी, लंदन और जिनेवा में उच्च शिक्षा और पेशेवर प्रशिक्षण प्राप्त किया। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने पत्रकार और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के रूप में की थी। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने संसद की सेवा में प्रवेश किया।

