रायपुर, 25 सितंबर (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। बैज ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने सहित कई फैसलों को लेकर चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी आपत्तियों को कथित तौर पर नजरअंदाज किया गया।
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों के दौरान कम से कम 14 मौकों पर विभिन्न फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इन फैसलों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने से जुड़े निर्णय भी शामिल थे। यदि रिपोर्ट में सामने आई जानकारी सही है तो चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
दीपक बैज ने ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने वोटों को प्रभावित किया और इससे भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचा। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार चुनाव आयोग और सरकार के बीच कथित मिलीभगत का मुद्दा उठाते रहे हैं।
बैज ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और सरकार मिलकर वोट, सीट और राजनीतिक दलों को प्रभावित करने का काम कर रहे हैं।
बैज ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर लगातार आवाज उठाती रही है और अब सामने आ रही जानकारी से उसके सवालों को बल मिला है। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े निर्णयों की पारदर्शी जांच की मांग दोहराई।
इस बीच, बैज ने झीरम घटना को लेकर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व की विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ बैठक प्रस्तावित है, जिसमें झीरम मामले पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि खास तौर पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की अदालत के हालिया फैसले पर चर्चा होगी। कांग्रेस इस फैसले से संतुष्ट नहीं है और पीड़ित परिवार भी इससे संतुष्ट नहीं हैं।
झीरम मामले में अदालत के फैसले पर बैज ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को अपेक्षित न्याय नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को उनके अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए थी, उन्हें सजा नहीं मिली।
बैज ने कहा कि जिन 10 लोगों को सजा सुनाई गई है, वे निचले स्तर के नक्सली या ‘संगम सदस्य’ हैं। वरिष्ठ नक्सलियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। आगामी चर्चा में झीरम घटना के पीड़ितों और शहीद परिवारों के साथ-साथ घायलों के मुद्दों को भी शामिल किया जाएगा।
