अयोध्या, 5 जुलाई (आईएएनएस)। राम मंदिर मामले की जांच चल रही है। इस बीच 6 जुलाई को श्री राम मंदिर जन्मभूमि क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक होने वाली है। इस बैठक से पहले विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने अयोध्या के डीसीपी को पत्र लिखकर विपक्ष के नेताओं के बयान दर्ज करने की मांग की। इस पर अयोध्या के साधु-संतों समेत तमाम लोगों की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
इस मामले पर साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने कहा, “निश्चित रूप से आलोक का बयान अत्यंत सराहनीय है। आरोप लगाने वालों के पास कोई तथ्य या सबूत हैं तो उन्हें प्रस्तुत करना चाहिए। संबंधित व्यक्तियों को तलब किया जाना चाहिए और उनसे साक्ष्य सहित अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा जाना चाहिए। लोग सनातन को धूमिल करने के लिए जो भी कदम उठाए गए, उसकी जांच की जानी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि आरोप लगाने वालों से साक्ष्य मांगे जाने चाहिए और साक्ष्य न देने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
महामंडलेश्वर विष्णुदास महाराज ने कहा, “अगर अरविंद केजरीवाल, सोनिया गांधी या किसी और के पास सबूत हैं, तो उन्हें आगे आकर एसआईटी के सामने पेश करना चाहिए। इससे चोरों का खुलासा हो सकेगा। चोरों का खुलासा होना चाहिए और सच्चाई तभी सामने आएगी जब अरविंद केजरीवाल जैसे नेता अयोध्या आकर अपने सबूत पेश करेंगे।”
उन्होंने आश्चर्य जताते हुए कहा कि आखिर इन लोगों को राम से प्यार कैसे हो गया है? इन लोगों ने तो राम मंदिर के निमंत्रण को भी ठुकरा दिया था।
वहीं, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा, “शर्म की भी एक सीमा होती है और जहां तक किसी धार्मिक संस्था का सवाल है, अगर कोई श्रद्धापूर्वक दान करता है तो वह इस इरादे से करता है कि उसका सदुपयोग हो, न कि चोरी या डकैती के लिए। हमारी मांग है कि इस तरह की हरकतों में शामिल लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। जिन लोगों ने दान दिया था, वह गरीबों और मंदिर के लिए दान दिया था। चोरी का धन वापस लाया जाना चाहिए।”
कांग्रेस यूपी के अध्यक्ष अजय राय का कहना है कि विश्व हिंदू परिषद को लिखना चाहिए कि चढ़ावा चोर, चंदा चोरी करने वाले, जमीन खरीद में हेराफेरी करने वाले, चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव से पूछताछ करें। ये भगवान का चंदा खा गए हैं। इन पर कार्रवाई होनी चाहिए। जनता उन्हें माफ नहीं करेगी।

