Wednesday, June 3, 2026
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने बदली रेखा बेसरा की जिंदगी, मजदूरी छोड़ शुरू किया मुर्गी पालन का व्यवसाय

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जामताड़ा, 3 जून (आईएएनएस)। झारखंड के जामताड़ा जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी का एक प्रेरणादायक उदाहरण उदलबनी पंचायत के धनबाद गांव की रहने वाली रेखा बेसरा हैं। वह कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रही थीं, लेकिन आज वह योजना का लाभ उठाकर सफल मुर्गी पालन उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।

रेखा बेसरा बताती हैं कि कुछ वर्ष पहले तक परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। उनके पति मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे और घर चलाना मुश्किल हो रहा था। इसी दौरान स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने उन्हें आजीविका मिशन के बारे में जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने समूह से जुड़कर प्रशिक्षण प्राप्त किया और बैंक से एक लाख रुपए का ऋण लेकर मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया।

आज रेखा के पास करीब 100 मुर्गियां हैं और उनका छोटा व्यवसाय लगातार बढ़ रहा है। मुर्गी पालन से होने वाली आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। अब रेखा और उनके पति लखेश्वर मुर्मू दोनों मिलकर मुर्गी फार्म का संचालन करते हैं। परिवार की आय बढ़ने से बच्चों की शिक्षा और परवरिश भी बेहतर तरीके से हो रही है।

रेखा के पति लखेश्वर मुर्मू अब अपने ही व्यवसाय का संचालन कर रहे हैं। वे फार्म की देखरेख और अंडों की बिक्री का काम संभालते हैं। रेखा द्वारा उत्पादित अंडों की स्थानीय बाजार में अच्छी मांग है और अधिकांश उत्पाद आसानी से बिक जाते हैं।

जामताड़ा जिले में रेखा बेसरा जैसी अनेक महिलाएं आजीविका मिशन के तहत मुर्गी पालन, बकरी पालन और अंडा उत्पादन जैसे स्वरोजगार से जुड़कर अपनी आय बढ़ा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, बैंक ऋण और बाजार से जुड़ने की सुविधा मिल रही है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।

अधिकारियों के अनुसार, आजीविका मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत महिलाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण, बैंक लिंकेज और विपणन सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

रेखा बेसरा की सफलता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती हैं। आजीविका मिशन के माध्यम से जामताड़ा की कई महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।