रीवा में कलेक्टर और कर्मचारियों के बीच विवाद सुलझा, काम न होने पर तहदीलदार को लगाई थी फटकार

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रीवा, 9 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में कलेक्टर और कर्मचारियों के बीच चल रहा विवाद शनिवार को सुलह के बाद समाप्त हो गया। पिछले दिनों सैकड़ों कर्मचारियों ने रीवा कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी पर अभद्र व्यवहार करने तथा अनावश्यक रूप से काम का दबाव बनाने का आरोप लगाया था। इसके विरोध में रीवा जिले में कर्मचारी संगठनों ने नए कलेक्टर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।

कलेक्टर का कहना था कि कर्मचारी काम नहीं कर रहे हैं। काम करने के लिए कहे जाने पर विरोध किया जा रहा है। 3 दिन चले इस विवाद का एक बैठक के साथ पटाक्षेप हुआ। रीवा के कर्मचारी और कलेक्टर के बीच शनिवार को कलेक्ट्रेट में एक बैठक हुई। कर्मचारियों का कहना है कि आपस में कुछ बातों को लेकर कंफ्यूजन हो गया था। अब ऐसा कुछ भी नहीं है। हम सब कलेक्टर साहब के मार्गदर्शन में फिर से काम पर लौट रहे हैं।

इससे पहले 6 मई को कलेक्ट्रेट कार्यालय में जन सुनवाई के दौरान एक गांव में पानी की समस्या और सरकारी हैंडपंप पर कब्जा किए जाने की शिकायत लेकर फरियादी पहुंचा था। मामला कलेक्टर के सामने आते ही वह भड़क गए और तहसीलदार और नायब तहसीलदार को मौके पर बुलाया और जमकर फटकार लगाई थी। उन्होंने सख्त अंदाज में कहा था, “तुम क्यों हो तहसीलदार, काहे के तहसीलदार हो, शाम को सूरज ढलने तक कार्रवाई नहीं की तो मैं तुम्हारे खिलाफ कार्रवाई करूंगा और दो दिन में मैं हटा दूंगा।”

कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी कड़े रुख और सख्त लहजे के लिए जाने जाते हैं। नरेंद्र कुमार ने ज्वाइनिंग के पहले ही दिन कलेक्टर कार्यालय जाने के बजाय अधिकारियों के साथ बस में सवार होकर रीवा के अंतिम छोर पर स्थित ग्रामीण अंचल पहुंचकर सबको चौंका दिया था। वहां उन्होंने जनता को मिलने वाली शासन की योजना के बारे में जानकारी जुटाई थी और सीधा संवाद भी किया था। कुछ दिन पूर्व ही कलेक्टर ने देर से दफ्तर आने वाले अधिकारियों को कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर ही लाइन से खड़ा करके जमकर फटकर लगाई थी और आधे-आधे दिन का वेतन काटने के निर्देश भी दिया था।