मुंबई, 8 सितंबर (आईएएनएस)। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई के चेयरमैन विजय कलंत्री ने रूसी प्रतिनिधिमंडल के साथ मीटिंग की। मुंबई में आयोजित इस बिजनेस कार्यक्रम में रूसी महिला प्रतिनिधि ने कहा कि रूसी बाजार में भारतीय कंपनियों के लिए बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए सूचना के अंतर को पाटना जरूरी है। भारतीय कंपनियों को व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों, सेमिनारों और प्रदर्शनियों में सक्रिय भागीदारी बढ़ानी होगी।
एक रूसी महिला प्रतिनिधि ने कहा, “मैं भारत के साथ लगभग 20 सालों से काम कर रही हूं। मेरा मानना है कि रूसी बाजार में भारतीय कंपनियों के लिए बहुत संभावनाएं हैं, लेकिन कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत है। सबसे पहले, भारतीय कंपनियों को सूचना के अंतर को दूर करना होगा। उन्हें विभिन्न व्यापार प्रतिनिधिमंडलों, सेमिनारों और प्रदर्शनियों में भाग लेने की आवश्यकता है। बेशक, और भी बहुत सारी जानकारियां साझा करने की जरूरत है। यह सक्रिय भागीदारी रूसी कंपनियों को उपलब्ध अवसरों के साथ-साथ भारत द्वारा पेश किए जा सकने वाले उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता और विविधता को समझने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।”
उन्होंने कहा कि अभी तक, पेमेंट में कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि रूबल-रुपया पेमेंट कॉरिडोर 40 साल से ज्यादा समय से है। यह अभी भी सक्रिय है और काम कर रहा है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया या सेंट्रल बैंक ऑफ रशिया की तरफ से कोई दिक्कत नहीं है। इसलिए अब कोई भी वित्तीय परेशानी नहीं है।
रूसी प्रतिनिधि ने कनेक्टिविटी को लेकर कहा कि अभी हम शुरुआती दौर में है और बहुत संभावनाएं हैं। ईरान और दुनिया के अलग हिस्सों में जो वर्तमान परिस्थिति है, उसमें हम देखेंगे कि भू-राजनीतिक रिस्क क्या-क्या है। चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारा और उत्तरी समुद्री मार्ग को विकसित करना भारत और रूस के लिए बहुत संभावनाओं से भरा होगा। आज नहीं तो कल ये कॉरिडोर दुनिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण होने जा रहा है।
वर्ल्ड ट्रेड सेंटर मुंबई के चेयरमैन विजय कलंत्री ने कहा, “पिछले साल, प्रधानमंत्री मोदी भी ग्लोबल फिनटेक इवेंट में आए थे और उसका उद्घाटन किया था। फिनटेक फील्ड में कई नए इनोवेशन हुए हैं। उदाहरण के लिए, यूपीआई की पहुंच काफी बढ़ गई है। इसका इस्तेमाल सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि कई दूसरे देशों में भी लगभग 70 फीसदी तक बढ़ गया है।”
विजय कलंत्री ने कहा कि आज के समय में यूपीआई के जरिए डिजिटलाइजेशन भारत में बड़े पैमाने पर हो गया है और हर आम आदमी इसका इस्तेमाल कर रहा है। आज एक सब्जी बेचने वाला भी यूपीआई का इस्तेमाल कर रहा है। आप देखेंगे कि कई सुधार लाए जा रहे हैं जो वित्तीय सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। भारतीय तकनीक को दूसरे देशों में भी अपनाया और मार्केट किया जा सकता है। जैसा कि आप जानते हैं, भारत तकनीक के मामले में काफी एडवांस्ड है, खासकर आईटी और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में।
