बंगाल चुनाव: सागर सीट पर कांटे की टक्कर, भाजपा के सुमंत मंडल जीते

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नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की सागर विधानसभा सीट पर हुए दिलचस्प चुनावी मुकाबले में भाजपा के सुमंत मंडल ने जीत दर्ज की। उन्होंने लगातार तीन बार से इस सीट का प्रतिनिधित्व करते आ रहे टीएमसी के नेता बंकिम चंद्र हाजरा को 7,881 वोटों से मात दी है।

भाजपा उम्मीदवार सुमंत मंडल को 1,27,802 वोट मिले, वहीं टीएमसी के बंकिम चंद्र हाजरा को 1,19,921 वोट मिले। तीसरे स्थान पर सीपीआई (एम) के स्वपन सिन्हा रहे और चौथे स्थान पर कांग्रेस के उम्मीदवार रहे।

सागर विधानसभा सीट दक्षिण 24 परगना जिले की अहम सीटों में गिनी जाती है। दक्षिण बंगाल के तटीय क्षेत्र की राजनीति में इस सीट का खास प्रभाव माना जाता है। सागर विधानसभा सीट मथुरापुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इस सीट पर पहले वाम दलों का दबदबा रहा, जबकि 2011 के बाद से तृणमूल कांग्रेस ने यहां मजबूत पकड़ बनाई। हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव में यहां दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला।

सागर विधानसभा सीट पर 2026 के चुनाव में कई प्रमुख उम्मीदवार मैदान में रहे। तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर मौजूदा विधायक बंकिम चंद्र हाजरा पर भरोसा जताया, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने सुमंत मंडल को उम्मीदवार बनाया था। वाम मोर्चे की ओर से सीपीआई (एम) ने स्वपन सिंह को चुनावी मैदान में उतारा। कांग्रेस ने प्रशांत खुटिया को प्रत्याशी बनाया। इसके अलावा सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) से अनुपम पानी और बहुजन समाज पार्टी से अनुकूल पात्रा भी चुनाव मैदान में उतरे।

सागर सीट पर मतदान हमेशा से काफी ऊंचा रहा है। 2011 में यहां 91.9 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो लंबे समय तक रिकॉर्ड रहा। 2026 में 92.75 प्रतिशत मतदान के साथ यह रिकॉर्ड टूट गया। इससे साफ है कि सागर सीट पर मतदाताओं की भागीदारी हमेशा काफी मजबूत रही है।

मथुरापुर लोकसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है और बापी हलदार यहां से सांसद हैं। वहीं, सागर विधानसभा सीट का गठन वर्ष 1951 में हुआ था। हालांकि 1957 और 1962 के चुनावों में यह सीट अस्तित्व में नहीं रही। बाद में पुनर्गठन के बाद यह सीट फिर चुनावी मानचित्र में शामिल हुई। इसका वर्तमान स्वरूप 2006 की परिसीमन प्रक्रिया के बाद तय हुआ।

सागर सीट पर सबसे लंबे समय तक वाम दल, खासकर सीपीआई (एम), का प्रभाव रहा। 1971 से 2006 तक इस सीट पर सीपीआई (एम) का मजबूत दबदबा रहा। हालांकि, 2011 के बाद से तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत की और बंकिम चंद्र हाजरा 2011, 2016 और 2021 में लगातार तीन बार विधायक चुने गए। इस लिहाज से ऐतिहासिक रूप से इस सीट पर वाम दलों का प्रभाव रहा है, जबकि हाल के वर्षों में तृणमूल कांग्रेस सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है।

2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के बंकिम चंद्र हाजरा ने 1,29,000 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। दूसरे स्थान पर भारतीय जनता पार्टी के कमिला बिकाश रहे, जिन्हें 99,154 वोट मिले थे। इस चुनाव में बंकिम चंद्र हाजरा ने 29,846 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी।