रांची, 5 जुलाई (आईएएनएस)। शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांगों को लेकर कांग्रेस की ओर से चलाए जा रहे ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत रविवार को रांची में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी नेताओं ने युवाओं का आह्वान किया कि वे व्यवस्था में आमूल चूल बदलाव के लिए आगे आएं। इस दौरान संवैधानिक मूल्यों पर भी युवाओं के साथ संवाद किया गया।
रांची स्थित कार्निवल बैंक्वेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के स्थायी आमंत्रित सदस्य एवं झारखंड प्रभारी के. राजू ने कहा कि भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की आत्मा है। यह सभी नागरिकों को समान अधिकार, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं की सबसे बड़ी जिम्मेदारी संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा करना और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाए रखना है।
उन्होंने छात्रों से शिक्षा के साथ सामाजिक और राष्ट्रीय सरोकारों के प्रति भी जागरूक रहने तथा संविधान के आदर्शों को समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा संविधान की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान ने प्रत्येक नागरिक को समान अवसर और सम्मानजनक जीवन का अधिकार दिया है।
उन्होंने छात्रों से संविधान को केवल परीक्षा का विषय नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शक मानने की अपील की। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यदि युवा संविधान के प्रति जागरूक होंगे तो लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा। उन्होंने समाज में संवाद, सहिष्णुता और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने संविधान, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय, लोकतंत्र और युवाओं की भागीदारी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे तथा वक्ताओं से सवाल भी पूछे।
संवाद सत्र में शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगार के अवसर, लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और संविधान की रक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा ने कहा कि ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और विद्यार्थियों को संविधान के मूल सिद्धांतों से जोड़ना, लोकतांत्रिक चेतना का विस्तार करना और सामाजिक तथा राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने संविधान की प्रस्तावना में निहित आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।
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