प्रयागराज, 8 मई (आईएएनएस)। गंगा की पवित्रता, यमुना की भक्ति और सरस्वती की आध्यात्मिक शक्ति, तीनों नदियों का जहां मिलन होता है, वह है प्रयागराज का त्रिवेणी संगम। सनातन धर्म की आस्था के सबसे बड़े प्रतीक इस पावन स्थल का नाम अब शराब पर लगाए जाने से हिंदू समाज में गहरा आक्रोश फैल गया है।
प्रयागराज में आईएएनएस से बातचीत में जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी नारायणाचार्य शांडिल्य महाराज ने विरोध जताते हुए कहा कि कंपनी का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए।
उन्होंने कहा कि संगम केवल एक नाम नहीं, बल्कि तीन पवित्र नदियों की पहचान है। संगम शब्द सुनते ही सनातन धर्मावलंबियों के मन में गंगा, यमुना और सरस्वती का पावन स्वरूप उभरता है। ये तीनों नदियां हमारे लिए देवियों का दर्जा रखती हैं। प्रयागराज तीर्थराज है, जिसे संगम नगरी भी कहा जाता है। यहां दुनिया भर से श्रद्धालु आते हैं। महाकुंभ के दौरान 66 करोड़ से अधिक लोग आस्था लेकर यहां पहुंचे और गंगाजल अपने घर ले गए। ऐसे पवित्र नाम का इस्तेमाल शराब जैसे नशीले पदार्थ के लिए करना हमारी आस्था, पूजा-पाठ, सनातन संस्कृति और तीनों देवियों का सीधा अपमान है।
उन्होंने बताया कि पहले भी स्थानीय लोगों ने मांग की थी कि संगम क्षेत्र के 5 किलोमीटर दायरे में शराब की बिक्री नहीं होनी चाहिए। इस मांग की अनदेखी कर ‘संगम’ नाम की शराब बाजार में उतार दी गई, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि हम योगी आदित्यनाथ सरकार से अपील करते हैं कि कंपनी का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए, उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए और दोषियों के खिलाफ देश के कानून के तहत सख्त मुकदमा दर्ज किया जाए। यदि जरूरी हुआ तो कंपनी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि भविष्य में कोई अन्य ब्रांड किसी भी पूजा स्थल या पवित्र नदी के नाम का दुरुपयोग न कर सके।
उन्होंने कहा कि संगम भारत की आत्मा, जीवन और सांस है। इसे अपवित्र करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पूरे सनातन समाज की ओर से पुरजोर विरोध जताया और कहा कि अगर सरकार समय रहते सख्त कदम नहीं उठाती तो जनता आंदोलन करने को मजबूर हो सकती है।
महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी ने कहा कि जिस भी कंपनी ने संगम नाम से शराब बनाने का प्रयास किया है, उस पर कार्रवाई की जाएगी। पार्षद कुसुम लता ने कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

