मुंबई, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। सऊदी अरब में हज और उमरा के लिए गए यात्रियों के फंसे होने को एनसीपी-एसपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नसीम सिद्दीकी ने आपातकालीन परिस्थिति करार दिया। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध और हूती विद्रोहियों के संघर्ष के चलते रियाद समेत कई शहरों पर हमले हुए हैं, जिससे फ्लाइट्स बंद हैं और यात्रियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। सिद्दीकी ने सरकार से मांग की है कि वह फंसे यात्रियों के रहने और खाने-पीने की व्यवस्था करे और अपने खर्च पर उन्हें जल्द देश वापस लाए।
नसीम सिद्दीकी ने कहा, “ये तो एक आपातकालीन परिस्थिति पैदा हुई है। जो युद्ध चल रहा है, उसमें ईरान का युद्ध हो या हूती विद्रोहियों का संघर्ष, जिसके चलते सऊदी अरब के रियाद और कई अन्य शहरों पर हमले हुए हैं, तो लोगों की जान-माल का खतरा है। इसी के मद्देनजर बहुत सारी फ्लाइट्स बंद हैं। मैं कहता हूं कि यह एक आसमानी मुसीबत और आफत है। सरकार को चाहिए कि इसमें विशेष तौर से ध्यान दिया जाए, जो वहां कुछ मोहलत के लिए गए हैं।”
नसीम सिद्दीकी ने कहा कि स्वाभाविक रूप से आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अधिकतर लोग गरीब या मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं। सरकार को चाहिए कि वह इसमें कुछ आर्थिक पहल करे। उनके रहने के साथ ही खाने-पीने की व्यवस्था करे तथा जल्द से जल्द उन्हें अपने खर्चे पर देश वापस लाने का काम करे।
जामिया मिलिया इस्लामिया और जेएनयू की दीवारों पर लिखे गए विवादित नारों को लेकर उन्होंने कहा कि कश्मीर तो हमारा है। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। उसे हमसे कोई नहीं ले सकता। मैं तो यह कहता हूं कि जो पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर है, उसे वापस लेने की बात होनी चाहिए। भारत को उस पर अपना अधिकार प्राप्त करने की आवश्यकता है। यदि इस प्रकार के नारे लिखे गए हैं, तो यह भी देखना चाहिए कि इनमें कोई साजिश हो सकती है। इसमें सत्ता पक्ष के लोग भी शामिल हो सकते हैं, क्योंकि हमने कई बार देखा है कि विपक्ष के धरनों में सत्ता पक्ष के लोग वेश बदलकर पहुंचते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मुसलमानों को बदनाम करने से जुड़ी घटनाएं भी सामने आई हैं। मुसलमानों के नाम से फर्जी आईडी बनाकर देश में कहीं न कहीं अव्यवस्था फैलाने की साजिश के आरोप भी सामने आए हैं। इस मामले में गहन जांच की आवश्यकता है।
एक अन्य मामले को लेकर नसीम सिद्दीकी ने कहा कि सत्य की हमेशा जीत होती है। इस देश की न्याय व्यवस्था अभी जिंदा है। यह समझने की जरूरत है। राहुल गांधी ने जो कुछ कहा था, सिर्फ उसी को मुद्दा बनाया जा रहा था। राहुल गांधी की हर बात को इस देश में मुद्दा बनाया जाता है। आज कोर्ट ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया।
उन्होंने कहा कि जब भी किसी रैली को अनुमति दी जाती है तो उसके रूट की ठीक से जांच-पड़ताल की जानी चाहिए। यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि रैली में कोई गलत नारा न लगाया जाए। हिंसा अच्छी बात नहीं है। हिंसा से किसी को फायदा नहीं होगा, बल्कि देश का ही नुकसान होगा।
