नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले में निर्णय दिया। इस फैसले पर अधिवक्ताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है, जिनमें ‘मत चोरी’ के दावे भी शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया वैध है और नियमों, कानून और संविधान के अनुसार है। हमने कोर्ट में कहा था कि एसआईआर प्रक्रिया हर पांच साल में होनी चाहिए।”
अश्विनी उपाध्याय ने आगे कहा, “लगभग 20 याचिकाएं दायर हुईं थीं, जो एसआईआर का विरोध कर रही थीं। इन याचिकाओं के माध्यम से एसआईआर, चुनाव आयोग और चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी सवालों को नकार दिया है और सभी आरोपों को दरकिनार कर दिया है और एसआईआर पर अपनी ‘सुप्रीम’ मोहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिन लोगों का नाम एसआईआर प्रक्रिया में छूट गया है, उससे यह नहीं साबित होता कि वे विदेशी हैं। जिन लोगों का नाम मतदाता सूची से कटा है, उसकी पूरी डिटेल ट्रिब्यूनल को दे दिया जाए, जो सिटीजनशिप तय करेगा।”
वकील अश्वनी सिंह ने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। यह अपने आप में ऐतिहासिक है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि अनुच्छेद 324 के तहत जिस भी संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया है, एसआईआर पर चुनाव आयोग द्वारा किया गया कार्य ऐतिहासिक था और एसआईआर प्रक्रिया को अत्यंत निष्पक्ष तरीके से संचालित किया गया। अवैध रूप से भारत में रह रहे लोगों और फर्जी मतदाताओं को हटाने के लिए एसआईआर प्रक्रिया अपनाई गई। बीएलओ के अनुसार ही मतदाता सूची तैयार की गई। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया को लेकर तारीफ की है।”

