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एसआईआर को लेकर विपक्ष एकजुट, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तेज

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नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। विपक्षी दलों के नेताओं का दावा है कि चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए कराया जा रहा एसआईआर देश के लिए गलत है। विपक्षी दलों की ओर से लगातार एसआईआर पर रोक लगाने की मांग की जा रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी जोर पकड़ रही है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम लोगों ने इंडिया ब्लॉक की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें अलायंस की 20 पार्टियों के सदस्यों, जिनमें हमारे लीगल सेल के कपिल सिब्बल भी शामिल थे। सभी की यही राय थी और वे इस बात पर सहमत थे कि एसआईआर देश के लिए गलत है। यह गरीब लोगों, कम पढ़े-लिखे लोगों, मजदूरों और खासकर अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों के नाम हटा रहा है। अगर आप किसी एक बूथ से 500 वोट हटा देते हैं, तो क्या इसे निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कहा जा सकता है?

उन्होंने कहा कि सत्ता का गलत इस्तेमाल हो रहा है, उसका सीधा असर हमारे युवाओं, गरीबों, दलितों और वंचितों पर पड़ रहा है। अमीर लोग तो किसी तरह अपना काम करवा लेते हैं, लेकिन अगर कुछ गड़बड़ हो जाए तो गरीब आदमी को उसे ठीक करवाने या रिन्यू करवाने के लिए अपना कामकाज छोड़कर जाना पड़ता है।

कांग्रेस नेता गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के बूथ-लेवल कार्यकर्ता पूरी तरह एक्टिव हैं और इस बात पर कड़ी नजर रख रहे हैं कि कोई भी वोट डिलीट न हो। राहुल गांधी पूरी शिद्दत से लोगों के हक की आवाज उठा रहे हैं। हम भी पंजाब में यह लड़ाई लड़ेंगे।

जमात-ए-इस्लामी हिंद से जुड़े मलिक मोतासिम खान ने कहा कि एसआईआर का मामला साफ तौर पर दिखाता है कि यह वोटर लिस्ट से वोटरों के नाम हटाने की एक साजिश है। इसका मतलब है कि चुनाव आयोग देश की वोटर लिस्ट से वोटरों के नाम हटा रहा है। लिस्ट से 13 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम हटा दिए गए हैं। कर्नाटक में फॉर्म-7 का मामला सामने आ रहा है, जिसमें वैध वोटरों के नाम हटाने की कोशिश के तहत आवेदन जमा किए जा रहे हैं। ऐसी खबरें भी हैं कि जो लोग वोटर नहीं हैं, उन्हें शामिल किया जा रहा है। खासकर जेनजी वोटर, जो पहली बार वोट देने जा रहे हैं, उनसे फॉर्म-6 में उनके माता-पिता और दादा-दादी की जानकारी मांगी जा रही है। एसआईआर एक फर्जी काम है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट ने इसका समर्थन किया और कहा कि इसे आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए।

प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा कि जब से एसआईआर शुरू हुआ है, तब से ही इसकी निष्पक्षता और मंशा पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सबसे पहले इसे बिहार में किया गया और वह भी जल्दबाजी में हुआ। वहां चुनाव नजदीक थे। कम समय में एसआईआर करने की कोशिश की गई और फिर हमने उसका नतीजा देखा, जिसमें बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटा दिए गए। उसके बाद इसे बंगाल और अन्य राज्यों में किया गया। अब मुख्य चुनाव आयुक्त जिस तरह से काम कर रहे हैं, उसमें दो चुनाव आयुक्तों ने शिकायतें कीं, लेकिन उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इससे अंदरूनी मामला सबके सामने आ गया है।

समाजवादी पार्टी के नेता राजकुमार भाटी ने कहा कि यह अच्छी बात है कि देशभर के नागरिक, खासकर युवा और जेनजी, इस सरकार की ज्यादतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं। चाहे वे किसी भी नाम या बैनर तले हों, यह एक स्वागत योग्य कदम है। देश के लोग जागरूक हो रहे हैं, जो देश के लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है और यह इस बात का सबूत है कि देश में लोकतंत्र का भविष्य उज्ज्वल है।

एक्टर प्रकाश राज ने कहा कि आज हम यह भी बता रहे हैं कि ‘एसआईआर’ का मकसद क्या है, खासकर तब जब चुनाव आयोग ने 2025 में वोटर लिस्ट का अपडेटेड वर्शन जारी किया। छह महीने के अंदर इसकी क्या जरूरत थी? क्या प्रक्रिया अपनाई गई? यह चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है कि चुनाव आयोग में कोई लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, और हम सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन जवाब नहीं मिल रहा है।

कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने एसआईआर को एक गंभीर चुनौती बताया और कहा कि राहुल गांधी ने यह मुद्दा उठाया है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के सदस्यों ने एसआईआर पर 14 बार आपत्ति जताई, लेकिन उनकी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया।

उन्होंने सवाल उठाया कि किसके इशारे पर उनकी बात नहीं मानी गई। लोकतंत्र को कमजोर करने का काम किया गया है। राहुल गांधी आम आदमी के अधिकार के लिए आवाज उठ रहे हैं।

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि चुनाव आयोग को सबसे पहले देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। देशभर में चले आंदोलन के दबाव में चुनाव आयोग अब अपना रवैया बदलने लगा है। यह आंदोलन हमारे नेता राहुल गांधी ने दो साल पहले शुरू किया था और बाद में दूसरी पार्टियों ने भी इसका समर्थन किया। राहुल गांधी का दिया एक नारा देश भर का नारा बन गया है।