Wednesday, June 24, 2026
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श्रीलंका: पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे पर भ्रष्टाचार का आरोप, आयोग ने किया तलब

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कोलंबो, 3 मई (आईएएनएस)। श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे और सांसद पियंकारा जयरत्ने को रिश्वत या भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़े मामलों में जांच के लिए रिश्वत-विरोधी आयोग ने तलब किया है।

विभिन्न मीडिया आउटलेट्स के अनुसार, दोनों नेताओं को ‘कमिशन टू इन्वेस्टिगेट एलिगेशंस ऑफ ब्राइबरी ऑर करप्शन’ (सीआईएबीओसी) के समक्ष पेश होने के लिए नोटिस जारी किया गया है। यह आयोग श्रीलंका में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाली प्रमुख संस्था है।

‘न्यूजवायरएलके’ और ‘अडाडेराना’ के अनुसार, एक प्रमुख एयरबस विमान खरीद घोटाले के बारे में बयान दर्ज कराने के लिए दोनों को तलब किया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, समन उन मामलों से संबंधित है जिनमें कथित तौर पर पद के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच की जा रही है। हालांकि, आरोपों के विस्तृत ब्योरे सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

न्यूजफर्स्ट और तमिल गार्जियन के अनुसार, जांच से पता चलता है कि सौदे से 60 मिलियन रुपए से अधिक का भुगतान उन्हें किया गया था। दोनों को श्रीलंकाई एयरलाइंस खरीद समझौते में भ्रष्टाचार के संबंध में बयान दर्ज करने के लिए 12 मई को बुलाया गया है। रिपोर्टों का हवाला देते हुए, श्रीलंकाई एयरलाइंस के एक पूर्व सीईओ ने आरोप लगाया कि 60 मिलियन रुपए किश्तों में महिंदा राजपक्षे को दिए गए थे, और पूर्व सिविल एविएशन मिनिस्टर प्रियंकारा जयरत्ने को 20 मिलियन दिए गए थे।

इस मामले में एयरबस डील के फंड शामिल हैं, जिन्हें कथित तौर पर ब्रुनेई की एक शेल कंपनी और सिंगापुर के बैंक अकाउंट के जरिए भेजा गया था।

महिंदा राजपक्षे पहले भी विभिन्न विवादों और जांचों के घेरे में रहे हैं, खासकर उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए कुछ आर्थिक और प्रशासनिक फैसलों को लेकर। वहीं, पियंकारा जयरत्ने भी कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं। जांच श्रीलंकाई एयरलाइंस की पूर्व सीईओ कपिला चंद्रसेना के खिलाफ बड़े मामले से जुड़ी है।

आयोग इन मामलों में दस्तावेजों और बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो दोनों नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

सीआईएबीओसी ने 2024 में नया एंटी-करप्शन कानून लागू होने के बाद एयरबस केस को फिर से शुरू किया।

इस घटनाक्रम को श्रीलंका में भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों के तहत एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है, जहां हाल के वर्षों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया गया है।