सुप्रीम कोर्ट पहुंचा नीट यूजी 2026 विवाद, एफएआईएमए ने दाखिल की याचिका

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नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। नीट यूजी 2026 परीक्षा को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) ने कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं और कई बड़े सुधारों की मांग की है।

एफएआईएमए का कहना है कि पिछले कुछ समय से नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की विश्वसनीयता पर बार-बार सवाल उठते रहे हैं। खासकर पेपर लीक, तकनीकी गड़बड़ियों और पारदर्शिता की कमी जैसी शिकायतों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों का भरोसा कमजोर किया है। इसी वजह से संगठन ने मांग की है कि नीट यूजी 2026 की पूरी प्रक्रिया को या तो दोबारा कराया जाए या फिर इसे न्यायिक निगरानी में कराया जाए, ताकि निष्पक्षता बनी रहे।

याचिका में सबसे बड़ा मुद्दा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को लेकर उठाया गया है। एफएआईएमए का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में एनटीए की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसलिए या तो इसे पूरी तरह हटाया जाए या फिर इसका पुनर्गठन करके एक नई, ज्यादा पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और स्वायत्त संस्था बनाई जाए।

इसके अलावा याचिका में यह भी मांग की गई है कि जब तक नई स्वतंत्र परीक्षा संस्था (एनईआईसी) की व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक नीट यूजी 2026 की परीक्षा और उससे जुड़ी पूरी प्रक्रिया एक हाई-पावर्ड कमेटी की निगरानी में हो। इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करें और इसमें एक साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ और एक फॉरेंसिक साइंटिस्ट को भी शामिल किया जाए।

एफएआईएमए ने यह भी सुझाव दिया है कि परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए डिजिटल लॉकिंग सिस्टम, कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए। साथ ही पारंपरिक ऑफलाइन परीक्षा के बजाय कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मॉडल को अपनाने पर भी जोर दिया गया है।

याचिका में कहा गया है कि सीबीआई चार हफ्तों के अंदर सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। इस रिपोर्ट में अब तक की जांच, पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क, गिरफ्तारियां, आरोपियों की जानकारी और आगे की कार्रवाई का पूरा विवरण शामिल होना चाहिए।

इसके साथ ही यह भी मांग की गई है कि नीट यूजी 2026 के सेंटर-वाइज रिजल्ट सार्वजनिक किए जाएं, ताकि किसी भी तरह की असामान्यता या गड़बड़ी को आसानी से पहचाना जा सके और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जा सके।