Tuesday, August 18, 2026
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उत्तर प्रदेश में बाढ़ पर प्रशासन अलर्ट, 13 जिलों के 173 गांव प्रभावित, 4845 लोगों को सुरक्षित निकाला

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लखनऊ, 18 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति फिलहाल सामान्य और नियंत्रण में है, लेकिन नदियों के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ के पूर्वानुमान को देखते हुए शासन ने राहत एवं बचाव तंत्र को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है।

राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने मंगलवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारियों को प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, भोजन-चिकित्सा की व्यवस्था करने और राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

राहत आयुक्त ने कहा कि बाढ़ चौकियों को पूरी तरह सक्रिय रखते हुए नदियों के जलस्तर और स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए। प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त नाव, मोटर बोट, बचाव दल और अन्य संसाधन उपलब्ध रहें तथा जान-माल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रूखाबाद, गौतमबुद्धनगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव समेत 13 जिलों के 173 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। करीब 13,058 हेक्टेयर क्षेत्र और 84,362 लोग प्रभावित हुए हैं।

प्रशासन ने प्रभावित लोगों के लिए 1,263 बाढ़ शरणालय तैयार किए हैं, जिनमें फिलहाल 41 का इस्तेमाल किया जा रहा है और 1,045 लोग रह रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 4,845 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। प्रदेश में 1,589 बाढ़ चौकियां सक्रिय हैं, जबकि 428 नाव और मोटर बोट तथा 1,101 स्थानीय गोताखोर राहत एवं बचाव कार्य में लगाए गए हैं।

राहत आयुक्त के अनुसार प्रभावित लोगों के बीच अब तक 15,238 राहत खाद्यान्न पैकेट और 30,316 लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ से 94 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें 65 मकानों के लिए सहायता राशि वितरित की जा चुकी है। इसके अलावा 669 राहत चौपाल आयोजित की गई हैं और 12,487 आपदा मित्रों को प्रथम प्रत्युत्तरकर्ता के रूप में प्रशिक्षित किया गया है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुधन और स्वास्थ्य सेवाओं को भी सक्रिय रखा गया है। अब तक 6,067 पशु प्रभावित हुए हैं। प्रभावित पशुओं के लिए 208 क्विंटल भूसा वितरित किया गया है, जबकि 11,465 बीमार पशुओं का उपचार और 4,04,036 पशुओं का टीकाकरण किया गया है। स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था के लिए 43,612 क्लोरीन टैबलेट और 23,476 ओआरएस पैकेट वितरित किए गए हैं।

प्रभावित जिलों में 724 मेडिकल टीमें और 534 एंबुलेंस उपलब्ध हैं। मच्छरजनित रोगों की रोकथाम के लिए 1,468 गांवों में लार्वीसाइडल का छिड़काव किया गया है। अब तक 19,406 लोगों का उपचार किया गया है, जबकि 566 लोगों को एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध कराया गया है।

आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश में एनडीआरएफ की 16 टीमें तैनात की गई हैं। वहीं, कई जिलों में एसडीआरएफ की टीमें लगाई गई हैं और लखनऊ में एसडीआरएफ की दो टीमें तैनात हैं। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रदेश के 52 जिलों में पीएसी की तैनाती की गई है।

राहत आयुक्त ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में जनपदीय अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय स्थापित कर बाढ़ से संबंधित गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। राहत आयुक्त कार्यालय स्थित नियंत्रण कक्ष से प्रभावित जिलों से लगातार संपर्क किया जा रहा है और 1070 पर आने वाली शिकायतों एवं सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों और अंतरविभागीय समन्वय की समीक्षा के लिए उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संयुक्त टीम ने बाढ़ से पहले बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, आजमगढ़, मऊ और बलिया समेत छह जिलों का स्थलीय निरीक्षण किया।

टीम ने मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की। बाढ़ शरणालयों, मॉडल बाढ़ शरणालयों, राहत किट, राहत एवं बचाव दलों की तैनाती तथा प्रभावित गांवों में की गई तैयारियों का भी निरीक्षण किया गया।

मौसम विभाग की चेतावनियों को समय से आमजन तक पहुंचाने के लिए एक अगस्त से 18 अगस्त के बीच 1,40,52,16,262 एसएमएस अलर्ट भेजे गए हैं। सोशल मीडिया के जरिए भी आपदा से बचाव और सुरक्षा के उपायों की जानकारी लगातार साझा की जा रही है।

राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार पिछले एक महीने में सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट को करीब 25 लाख लोगों ने देखा और साझा किया। बाराबंकी में एल्गिन ब्रिज के पास घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। बदायूं के कचला ब्रिज और फर्रूखाबाद के फतेहगढ़ में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान पर है। लखीमपुर खीरी के पलियाकलां और शारदानगर में शारदा नदी तथा अयोध्या और बलिया के तुर्तीपार में घाघरा नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान के आसपास है।

राहत आयुक्त ने बताया कि धर्मनगरी, गढ़मुक्तेश्वर, कचला ब्रिज, फतेहगढ़ और अंकिनघाट में गंगा, रिहंद बांध में रिहंद, बाणसागर बांध में सोन, एल्गिन ब्रिज, अयोध्या और तुर्तीपार में घाघरा तथा कुशीनगर में गंडक नदी को लेकर बाढ़ की संभावना का पूर्वानुमान है।

उन्होंने कहा कि शासन और जिला प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ राहत एवं बचाव कार्य प्रभावी ढंग से संचालित करने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।