नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। रूस-यूक्रेन युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के दौरान भारत सरकार ने आम लोगों को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी राहत दी। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट “पेट्रोल और डीजल: उपभोक्ता संरक्षण की संरचना” में दावा किया गया है कि भारत दुनिया की इकलौती बड़ी अर्थव्यवस्था रहा, जिसने दोनों वैश्विक ऊर्जा संकटों के दौरान खुदरा ईंधन कीमतों में कटौती की।
रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2021 से मार्च 2026 तक सरकार ने पेट्रोल पर कुल 27 रुपए और डीजल पर 30 रुपए तक की राहत दी। इसमें 27 मार्च 2026 को स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (एसएईडी) में कटौती के जरिए पेट्रोल और डीजल दोनों पर 10-10 रुपए प्रति लीटर की राहत शामिल है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद केंद्र सरकार ने कई बार इसका बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं डाला। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर और राजस्व नुकसान सहकर आम लोगों को राहत दी।
रिपोर्ट में कांग्रेस के ‘ओवर टैक्सेशन’ यानी अधिक टैक्स वसूली के आरोपों का भी जवाब दिया गया है। इसमें कहा गया है कि यूपीए सरकार के समय तेल कंपनियों को राहत देने के लिए ऑयल बॉन्ड जारी किए गए थे, जिनका भुगतान बाद की सरकारों और भविष्य की पीढ़ियों पर डाल दिया गया।
वहीं, मौजूदा सरकार ने सीधे एक्साइज ड्यूटी घटाकर राहत दी, जिससे उपभोक्ताओं को तुरंत फायदा मिला और भविष्य पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने अलग-अलग समय पर पेट्रोल और डीजल पर राहत दी है। 4 नवंबर 2021 को पेट्रोल पर 5 रुपए और डीजल पर 10 रुपए की कटौती की गई थी। इसके बाद 21 मई 2022 को पेट्रोल पर 8 रुपए और डीजल पर 6 रुपए की राहत दी गई थी। वहीं, 14 मार्च 2024 को तेल कंपनियों की ओर से दोनों पर 2-2 रुपए की कटौती की गई थी। अप्रैल 2025 में पेट्रोल और डीजल पर फिर 2-2 रुपए की राहत दी गई। इसके बाद 27 मार्च 2026 को एसएईडी कटौती के जरिए दोनों ईंधनों पर 10-10 रुपए की राहत दी गई।
हालांकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के चलते बीते 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमशः 3.14 रुपए 3.11 रुपए की वृद्धि की गई। इसके चार दिन बाद यानी 19 मई को एक बार फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर के हिसाब से बढ़ोतरी की गई।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फरवरी 2026 में होर्मुज जलडमरूमध्य संकट शुरू होने के बाद दुनिया के कई देशों में ईंधन कीमतों में 10 से 90 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई, जबकि भारत में लगभग 12 सप्ताह तक कीमतें लगभग स्थिर रखी गईं।
रिपोर्ट में कहा गया कि होर्मुज संकट के दौरान जब ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, तब सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भारी नुकसान सहकर भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखा। केवल मार्च 2026 की एसएईडी कटौती से केंद्र सरकार पर लगभग 30 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ा।
इसके अलावा तेल कंपनियों ने भी अंडर-रिकवरी झेली ताकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिलती रहे। रिपोर्ट में कहा गया कि फरवरी 2022 से फरवरी 2026 के बीच दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में एक प्रतिशत से भी कम बदलाव हुआ, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि देश भर में पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी समान है, लेकिन अलग-अलग राज्यों में वैट की दरें अलग होने के कारण कीमतों में अंतर दिखाई देता है। रिपोर्ट के मुताबिक आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में पेट्रोल 107 रुपए प्रति लीटर से ऊपर है क्योंकि वहां वैट ज्यादा लगाया जाता है।
वहीं गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, गोवा और असम जैसे राज्यों में पेट्रोल की कीमतें अपेक्षाकृत कम हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया कि केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी घटाने के बावजूद कई विपक्ष शासित राज्यों ने वैट में कमी नहीं की।
रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया कि रूस-यूक्रेन युद्ध और होर्मुज संकट जैसे कठिन वैश्विक हालातों के बावजूद भारत सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कई कदम उठाए, जिसमें एक्साइज ड्यूटी में कटौती, ऑयल बॉन्ड्स का भुगतान और तेल कंपनियों के जरिए नुकसान को समायोजित करना शामिल रहा। रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया की उन चुनिंदा बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा, जिसने वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान भी आम लोगों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत देने की कोशिश जारी रखी।

