मुंबई, 4 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ओर से महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए एसआईआर और वोट चोरी का मुद्दा उठाए जाने के बाद विपक्षी दलों के नेताओं ने भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) के नेताओं ने आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया का इस्तेमाल भाजपा अपने राजनीतिक हित के लिए कर रही है।
एनसीपी (एसपी) नेता क्लाइड क्रास्टो ने एसआईआर को लेकर दावा किया कि महाराष्ट्र में दो करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम जोड़े गए थे, लेकिन अब इतनी बड़ी संख्या में नाम कैसे हटा दिए गए। महाराष्ट्र की मतदाता सूची में करीब 9 करोड़ नाम थे, जिनमें से अब लगभग 7 से 7.5 करोड़ नाम ही रह गए हैं। करीब 21 प्रतिशत नाम हटाए जाने का दावा बेहद गंभीर है।
मुंबई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शहर में करीब 36 लाख लोगों के नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। क्या किसी विशेष वर्ग के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। क्रास्टो ने चुनाव आयोग और भाजपा से इस संबंध में महाराष्ट्र की जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
शिवसेना (यूबीटी) नेता अंबादास दानवे ने दावा किया कि महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया के तहत 2 करोड़ 38 लाख से अधिक लोगों के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी करीब 98 लाख लोगों के लिए इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई थी। पश्चिम बंगाल से जुड़ा मामला अभी अदालत में लंबित है। दानवे ने दावा किया कि यदि उन 98 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से नहीं हटाए गए होते तो पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम अलग हो सकते थे। भाजपा अलग-अलग राज्यों में इस प्रक्रिया का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे और चुनावी रणनीति के तहत कर रही है।
कांग्रेस नेता वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि अगर मतदाता सूची से करीब दो करोड़ नाम हटाए जाने का दावा सही है, तो इससे पहले हुए विधानसभा चुनाव और बीएमसी चुनाव की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत चुनाव आयोग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना तथा प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा करना है।
शिवसेना (यूबीटी) नेता अरविंद सावंत ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी पार्टी ने कथित वोटों की धांधली को लेकर सवाल उठाए थे, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मतदाता सूची से नाम हटाए गए हैं और बाद में उन्हीं लोगों के नाम दोबारा किसी राजनीतिक लाभ के लिए जोड़े जाते हैं, तो इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
