नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। विश्व विकास सूचना दिवस हर साल 24 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह सूचना और संचार तकनीक (आईसीटी), इंटरनेट और मीडिया के माध्यम से विकास संबंधी जानकारी को आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर देता है।
दरअसल, समावेशी सूचना तंत्र के सकारात्मक प्रभाव का सबसे बड़ा प्रमाण भारत का ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (डीपीआई) है, जहां एकीकृत भुगतान प्रणाली (यूपीआई) ने वर्ष 2016 में मात्र 0.01 करोड़ मासिक लेनदेन से शुरुआत करके वर्ष 2025 तक 2,000 करोड़ से अधिक मासिक लेनदेन का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है।
ऐतिहासिक दृष्टि से 24 अक्टूबर को केवल ‘संयुक्त राष्ट्र दिवस’ ही नहीं मनाया जाता, बल्कि वर्ष 1970 में इसी दिन अपनाई गई ‘द्वितीय संयुक्त राष्ट्र विकास दशक की अंतरराष्ट्रीय विकास रणनीति’ की स्मृति में इसे ‘विश्व विकास सूचना दिवस’ के रूप में भी समर्पित किया गया है।
वर्ष 1972 में जब दुनिया शीत युद्ध के चरम पर थी, तब भू-राजनीतिक तनावों के कारण अंतरराष्ट्रीय सहयोग बाधित था और सूचनाओं का प्रवाह अत्यंत सीमित था। इसी गतिरोध को तोड़ने के लिए व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के तृतीय सत्र में विकास की समस्याओं के समाधान हेतु सूचना के व्यापक प्रसार का विचार सामने आया।
इसके परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने 27वें सत्र में 19 दिसंबर 1972 को ऐतिहासिक प्रस्ताव संख्या 3038 पारित कर ‘विश्व विकास सूचना दिवस’ की नींव रखी। 24 अक्टूबर 1973 को आयोजित प्रथम विश्व विकास सूचना दिवस सम्मेलन में चिदंबरम सुब्रमण्यम तथा एडेबायो एडेडेजी जैसे नीति-निर्माताओं ने संवाद स्थापित किया, और अक्टूबर 1974 में प्रख्यात अर्थशास्त्री जॉन केनेथ गालब्रेथ ने इस वैश्विक मंच को संबोधित किया।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित सिद्धांतों के अनुसार, इस दिवस का मूल उद्देश्य यह है कि विकास का अंतिम उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति के कल्याण में निरंतर सुधार लाना और समाज के सभी वर्गों तक उसका लाभ पहुंचाना है। संयुक्त राष्ट्र स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है कि यदि समाज में अनुचित विशेषाधिकार, संपत्ति की असमानता और सामाजिक अन्याय बने रहते हैं तो विकास अपने मूल उद्देश्य में विफल हो जाता है।
विश्व विकास सूचना दिवस का केंद्रीय स्तंभ ‘जनमत का एकत्रीकरण’ है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विकसित देशों की सरकारों का यह दायित्व है कि वे अपने नागरिकों को वैश्विक विकास की परस्पर निर्भरता समझाएं और विकासशील देशों को संसाधन व प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रदान करें। विश्व स्तर पर 15 से 24 वर्ष आयु के 79 प्रतिशत युवा इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं, इसलिए युवाओं की डिजिटल ऊर्जा को रचनात्मक विकास से जोड़ना समय की मांग है।
इस दिशा में भारत का ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (आधार, यूपीआई और इंडिया स्टैक) विकासशील विश्व के लिए एक प्रमाणित मॉडल बनकर उभरा है, जिसे विश्व के शीर्ष 10 सबसे प्रभावी सुधारों में स्थान मिला है। वित्त वर्ष 2021-22 में ही 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का लेनदेन संसाधित करने वाले यूपीआई के संदर्भ में विश्व बैंक के अध्ययन से सिद्ध होता है कि इस डिजिटल मंच से जुड़ने वाले बैंकों ने 2 प्रतिशत अधिक वृद्धि दर्ज की है।
