लखनऊ, 3 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को आईएएनएस से बातचीत में विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के संभावित गठबंधन पर कहा कि ये लोग जिससे चाहे गठबंधन कर लें। इन लोगों का सरकार बनाने का सपना दिवास्वप्न के बराबर ही होगा। पूरे प्रदेश में योगी मॉडल के विकास की चर्चा है। आपको राज्य के हर कोने में विकास के कार्य होते हुए नजर आएंगे। चाहे आप रेल कनेक्टिविटी देख लीजिए या एक्सप्रेस-वे कनेक्टिविटी देख लीजिए।
मंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है कि जब विपक्ष की ओर से प्रदेश में सरकार बनाने का दावा किया गया हो, बल्कि इससे पहले भी कई बार ये लोग सरकार बनाने का दावा कर चुके हैं। इन लोगों का दावा महज दावा बनकर ही रह जाता है। 2017, 2022 और 2024 के चुनाव में भी ये लोग सरकार बनाने का दावा कर चुके हैं। लेकिन, आगे चलकर परिणाम क्या निकलकर सामने आया है, यह बात किसी से छुपी नहीं है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस बार फिर राज्य में सीएम योगी सत्ता संभालेंगे। दो तिहाई बहुमत के साथ उनकी सरकार प्रदेश में बनने जा रही है।
यूपी में कांग्रेस-सपा के संभावित गठबंधन पर मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और राज्य की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि उसकी स्थिति सपा की तुलना में मजबूत है। ऐसे में उसकी ओर से जितनी सीटें मांगी जा रही है, उसे दिया जाना चाहिए। उन्होंने अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि आने वाले दिनों में पूरे देश में भाजपा का सफाया होने जा रहा है। राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि वो अपना देख लें। अपनी स्थिति का मूल्यांकन कर लें। कहीं ऐसा न हो कि अगले चुनाव में उनका ही सफाया हो जाए।
उन्होंने उन आरोपों पर भी जवाब दिया, जिसमें यह कहा गया था कि उनके विभाग के अधिकारी उनकी बात मानने को तैयार नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी हमारी बात नहीं मान रहे हैं। समय नहीं दे रहे हैं। अपने कामों को नहीं देखते हैं। अगर हम जिलों की बात करें, तो 32 बारात घर बनाए जा रहे हैं। लेकिन, अभी तक 10-12 बारात घर ऐसे हैं, जिनका डीपीआर तैयार नहीं हुआ है। पिछले डेढ़ साल से इन अधिकारियों का ऐसा ही रवैया रहा है। अब अगर डीएम का सहारा लेकर पंचायती राज का भी काम होगा, तो आपकी क्या जरुरत होगी। आपको जिस काम के लिए नियुक्त किया गया है, उसे पूरा कराओ।
उन्होंने अखिलेश यादव के रवैये पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, जेपीएनआईसी का काम 200 करोड़ रुपए में तय हुआ था। लेकिन, उसे अखिलेश यादव बढ़ाते हुए 800 करोड़ रुपए तक ले गए। अफसोस की बात है कि काम पूरा नहीं हुआ और सरकार भी चली गई। अब 200 करोड़ के बाद जो पैसा लगा है, वो पैसा कहां गया? क्या ये घोटाला और लूट नहीं है? खनन मामले में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की है, उसमें अखिलेश यादव का भी नाम शामिल है। अखिलेश यादव के शासनकाल में ही तो सारे घोटाले हुए हैं। दंगे इनके शासन में हुए हैं। गैंगवार इनकी सरकार में हुए थे। इनके शासनकाल में अपराधी घूमते थे। मुजफ्फरनगर दंगे में जल रहा था और सैफई में नाच देख रहे थे। आज यह योगी सरकार पर अंगुली उठा रहे हैं।
मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि जब अखिलेश यादव की सरकार थी, तो उन्होंने सिर्फ अपनी जाति के लोगों को बढ़ाने का काम किया। उन्होंने 20 प्रतिशत मुसलमानों को धोखा दिया। इसी 20 प्रतिशत मुसलमानों ने यादवों को चार बार सीएम बनाया। यादवों का भी यह कर्तव्य बनता है कि वो मुसलमानों को भी एक बार सीएम पद की जिम्मेदारी दें। लेकिन, वो ऐसा नहीं कर रहे हैं। कांग्रेस और सपा में जितने भी मुस्लिम नेता हैं, वो सभी आज की तारीख में गुलामों की तरह काम कर रहे हैं। दोनों पार्टियों में किसी भी मुस्लिम नेता में इतनी हिम्मत नहीं है कि वो राहुल गांधी और अखिलेश यादव के सामने जाकर यह बोल दें कि एक मुस्लिम को सीएम पद की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति पर विपक्ष के आरोपों पर राजभर ने कहा कि पूरे सिस्टम के तहत यह नियुक्ति हुई है। विपक्ष तो हर मुद्दे को लेकर आलोचना करता है। विपक्ष हर काम पर सवाल उठाता है।
