लखनऊ, 27 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले पर राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन ने योगी सरकार के प्रति आभार जताते हुए इसे पंचायत व्यवस्था को मजबूती देने वाला “ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम” बताया है।
संगठन ने कहा कि इस निर्णय से गांवों में विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी और प्रधानों की साख भी मजबूत होगी। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2021 में ग्राम उत्कर्ष समारोह के दौरान ट्रिपल इंजन सरकार चलाने का जो वादा किया था, उसे अब पूरा किया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रधान इस फैसले को “उपहार” मानते हैं और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका “रिटर्न गिफ्ट” देंगे। उन्होंने बताया कि संगठन राज्य, मंडल, जनपद और ब्लॉक स्तर पर समारोह आयोजित कर सरकार के प्रति आभार व्यक्त करेगा। साथ ही पंचायतों से जुड़ी समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर सरकार से संवाद जारी रखा जाएगा।
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने कहा कि 2 अप्रैल से 25 मई के बीच संगठन ने लगातार शासन और भाजपा नेतृत्व के साथ संवाद किया। इस दौरान पंचायतीराज विभाग, मुख्यमंत्री कार्यालय और भाजपा संगठन के समक्ष अन्य राज्यों के उदाहरण भी रखे गए। उन्होंने बताया कि संगठन ने 2 अप्रैल को पंचायतीराज निदेशक अमित सिंह और प्रमुख सचिव अनिल कुमार (तृतीय) से मुलाकात कर मांग रखी थी।
इसके बाद मुख्यमंत्री के सचिव सुरेंद्र सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर, अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद तथा भाजपा प्रदेश नेतृत्व से भी विभिन्न दौर की बैठकें की गईं। संगठन के अनुसार, राजस्थान सरकार द्वारा जनवरी 2025 और उत्तराखंड सरकार द्वारा दिसंबर 2024 में प्रधानों को प्रशासकीय अधिकार दिए जाने के उदाहरण भी उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे।
प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों में प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने की मांग को स्वीकार किया गया। प्रधान संगठन के नेताओं ने फैसले के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी तथा सरोजनीनगर विधायक राजेश्वर के प्रति आभार व्यक्त किया। संगठन ने प्रदेश भर के ग्राम प्रधानों को भी बधाई दी।

