गुरुदेव की मूर्ति पर पुष्पांजलि, कविता पाठ और ‘गीतांजलि’ पुस्तिका का लोकार्पण
भोपाल, 7 मई | रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (आरएनटीयू) के मुक्तधारा सभागार में गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती ‘प्रणति पर्व’ के रूप में मनाई गई। विश्व कवि के जीवन और सृजन को नमन करते हुए यह आयोजन टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केन्द्र के परिसर में हुआ, जहाँ कला, साहित्य और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला।
गुरुदेव का संदेश – “कला, ज्ञान की प्रयोगशाला”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने गुरुदेव के उस कथन को याद किया कि “कला, ज्ञान की प्रयोगशाला है।” उन्होंने रेखांकित किया कि टैगोर जीवन को समग्रता में देखने के हिमायती थे। साहित्य, संस्कृति, शिक्षा, दर्शन, अध्यात्म और विज्ञान में उनकी गहरी रुचि थी। वे सदैव “संस्कृति की घनी छाँव” की तरह याद आते हैं।
पुष्पांजलि और राष्ट्रगान से मंगलाचरण
समारोह की शुरुआत गुरुदेव की प्रतिमा पर सामूहिक पुष्पांजलि एवं उनके द्वारा रचित राष्ट्रगान से हुई। इस अवसर पर कुलगुरु डॉ. आर.पी. दुबे, निदेशक एजीयू डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स, कुलसचिव डॉ. संगीता जौहरी, टैगोर कला केन्द्र के निदेशक विनय उपाध्याय तथा टैगोर नाट्य विद्यालय के निदेशक अविजीत सोलंकी ने अपने विचार रखे।
विनय उपाध्याय ने रखी प्रस्तावना
विनय उपाध्याय ने समारोह की प्रस्तावना रखते हुए टैगोर के रचनात्मक कौशल और ‘विश्व रंग’ के माध्यम से उनके सांस्कृतिक विस्तार को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि टैगोर कला केन्द्र द्वारा स्थापित पुस्तकालय और संदर्भ केन्द्र टैगोर की विरासत को जानने-समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कविता पाठ और ‘गीतांजलि’ का लोकार्पण
कार्यक्रम के पूर्वरंग में नाट्य विद्यालय के छात्रों आशुतोष, लवकुश कुमार, आर्यन, विक्रम, दक्ष कौशिक, विजय सरदार, दुर्गेश कुमार तथा मिहिर कसेरा ने गुरुदेव की कविताओं का भावपूर्ण पाठ किया। यह चयन ‘रंग संवाद’ के सहायक संपादक मुदित श्रीवास्तव ने किया। प्रेम, प्रकृति और मानवीय संबंधों की सुगंध से सराबोर इन रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
आरंभ में टैगोर के गीतों पर केन्द्रित संगीत-नृत्य रूपक ‘गीतांजलि’ पुस्तिका का लोकार्पण भी किया गया। यह पुस्तिका टैगोर राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय तथा विश्व रंग फाउण्डेशन के साझा संयोजन में तैयार की गई है।
उपस्थित गणमान्य लोग
इस अवसर पर मानविकी तथा उदार कला संकाय की डीन डॉ. रूचि मिश्रा तिवारी, विश्व रंग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विकास अवस्थी, भारतीय ज्ञान परंपरा केन्द्र की संयोजक डॉ. सावित्री सिंह परिहार सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएँ उपस्थित थीं।


