SGSU Advertisement
Home राज्य नवकरणीय ऊर्जा का उत्पादन और ऊर्जा भंडारण समग्र पर्यावरण की दृष्टि से...

नवकरणीय ऊर्जा का उत्पादन और ऊर्जा भंडारण समग्र पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

0
4

नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की किफायती खरीद पर विचार-मंथन के लिए भोपाल में एकत्र हुईं विद्युत कंपनियां
भोपाल : 22 सितंबर/ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश, पावर कट से पावर सरप्लस स्टेट अर्थात बिजली गुल से बिजली फुल राज्य बना है। हमारा प्रदेश आज देश के उन चुनिंदा राज्यों में से एक है जो अपनी ऊर्जा जरूरत से आगे बढ़कर देश की ऊर्जा आवश्यकता को पूरा करने की क्षमता रखते हैं। वर्तमान में नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण केवल देश ही नहीं, अपितु समग्र पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। आज मध्यप्रदेश में 32 हजार मेगावाट की ऊर्जा क्षमता है, जिसमें से 30% हिस्सा क्लीन एनर्जी का है। मध्यप्रदेश, विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण की किफायती खरीद विषय पर आयोजित ऑल इंडिया डिस्काम एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस के शुभारंभ अवसर पर यह विचार व्यक्त किये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस का होटल मैरिएट में दीप प्रज्जवलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर पुस्तक ‘सैलियंट पॉवर स्टैटिस्टिक्स वर्ष 2024-25 से 2025-26’ विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विद्युत वितरण कम्पनियों के इस साझा मंच से ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों के ठोस समाधान निकलेंगे। इस अवसर पर ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार, प्रमुख सचिव ऊर्जा श्री मनीष सिंह, सचिव उर्जा श्री विशेष गढ़पाले, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री ऋषि गर्ग, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री अजय गुप्ता, मध्य प्रदेश उर्जा विकास निगम के प्रबंध संचालक श्री अमित तोमर विशेष रूप से उपस्थित थे।

मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अपने रिकॉर्ड स्वयं तोड़ रहा है

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान समय में सभी क्षेत्रों में बिजली अनिवार्य आवश्यकता बन गई है। राज्य सरकार बिजली की खपत बढ़ाने के साथ-साथ इसके उत्पादन और संधारण पर विशेष ध्यान दे रही है। राज्य में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए नई तकनीक के साथ नई इकाईयां प्रारंभ की गई हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में देश में 360 डिग्री बदलाव आया है। जब जी-20 सम्मेलन में ग्रीन-क्लीन एनर्जी का उत्पादन बढ़ाने और उपयोग का मुद्दा उठा, तो भारत ऐसा देश रहा, जिसने 50 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त करके दिखाया है। यह प्रधानमंत्री श्री मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प से ही संभव हो पाया है। अब हम नवकरणीय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अपने रिकॉर्ड स्वयं तोड़ते जा रहे हैं।

राज्य सरकार बिजली उत्पादन में आ रही सभी चुनौतियों का समाधान करने के लिए तत्पर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश के सभी क्षेत्रों की अपनी एक अलग विशेषता है। ग्रीन- गो ने नीमच-मंदसौर में 2000 मेगावॉट क्षमता का प्लांट स्थापित किया है। यह देश का सबसे अनूठा और सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा। आमतौर पर इतनी बड़ी परियोजना का काम पूरा होने में 4 से 6 वर्ष लग जाते हैं, लेकिन सौभाग्य का विषय है कि मध्यप्रदेश में यह काम केवल दो से ढाई साल में पूर्ण हो रहा है। राज्य सरकार बिजली उत्पादन में आ रही सभी प्रकार की चुनौतियों का समाधान करने के लिए तत्पर है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देश को सौर ऊर्जा की शक्ति से परिचित कराया है। देश में सौर ऊर्जा के उपयोग के कारण कार्बन उत्सर्जन में 20 करोड़ टन से अधिक गिरावट दर्ज की गई है। थर्मल पॉवर और अन्य पारंपरिक तरीकों के स्थान पर अब हम विंड, सोलर और पंप स्टोरेज से बिजली बना रहे हैं। मध्यप्रदेश में अब पानी से और पानी पर भी बिजली बन रही है।

सस्ती भरोसेमंद बिजली के लिए उपयोगी रहेगी कार्यशाला

ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र अभूतपूर्व बदलाव से गुजर रहा है। हमारी जिम्मेदारी केवल बढ़ती विद्युत मांग को पूरा करना नहीं, बल्कि उसे विश्वसनीय, टिकाऊ और किफायती बनाना है। भविष्य के लिए हमें सौर, पवन और ऊर्जा भंडारण का ऐसा संतुलित मिश्रण विकसित करना होगा, जिससे ऊर्जा संक्रमण की लागत न बढ़े और उपभोक्ताओं पर आर्थिक भार न पड़े।

ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल श्री आलोक कुमार ने कांफ्रेस के उद्देश्यों की जानकारी दी। प्रमुख सचिव ऊर्जा श्री मनीष सिंह ने कॉन्फ्रेंस में पधारने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त किया।

तकनीकी सत्रों में श्री आलोक कुमार तथा डायरेक्टर AIDA श्री एस. एन. कलिता ने AIDA की गतिविधियों, अध्ययन परियोजनाओं, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा विद्युत वितरण क्षेत्र के लिए चल रही विभिन्न पहलों पर विस्तृत प्रस्तुतियां दीं। प्रस्तुतियों में नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण की खरीद, मांग पूर्वानुमान, संसाधन पर्याप्तता, विद्युत खरीद में जोखिम संतुलन, दीर्घकालिक संसाधन नियोजन तथा वितरण कंपनियों के लिए लागत प्रभावी खरीद ढांचों पर विशेष चर्चा की गई।

कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन डॉ. आशीष कुमार गोयल, तथा सचिव, ऊर्जा श्री विशेष गढ़पाले, ने भी अपने विचार साझा किए। प्रस्तुतियों में मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश की पूरक मौसमी मांग आवश्यकताओं के आधार पर सौर ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण के बेहतर उपयोग, साझा ऊर्जा परिसंपत्तियों के विकास, मांग प्रबंधन तथा लागत अनुकूलन की संभावनाओं पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।

कार्यशाला के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण की खरीद, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS), पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं, मांग पूर्वानुमान, संसाधन पर्याप्तता, विद्युत खरीद में लचीलापन, लागत अनुकूलन तथा दीर्घकालिक विद्युत खरीद समझौतों में जोखिम आवंटन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। प्रतिभागियों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वितरण कंपनियों को मजबूत अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक मांग पूर्वानुमान प्रणालियां विकसित करनी होंगी तथा संसाधन पर्याप्तता के आधार पर चरणबद्ध ढंग से ऊर्जा भंडारण संसाधनों की खरीद को बढ़ावा देना होगा।

आयोजित पैनल चर्चा में श्री शाश्वत कुमार (CSIS), प्रो. हिमांशु जैन (आईआईटी रुड़की), श्री जगबंता निंगथौजम (RMI) तथा श्री ऐन जोसे (प्रयास एनर्जी ग्रुप) ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण, ऊर्जा भंडारण, संसाधन पर्याप्तता, नियामकीय ढांचे तथा वितरण कंपनियों के लिए लागत प्रभावी विद्युत क्रय रणनीतियों पर अपने विचार साझा किए।

कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने वितरण कंपनियों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने, श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने तथा भारत के विद्युत वितरण क्षेत्र को अधिक विश्वसनीय, किफायती, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में सामूहिक प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। प्रतिभागियों ने इस बात पर भी बल दिया कि AIDA की यह प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला विद्युत वितरण क्षेत्र में ज्ञान-साझाकरण, क्षेत्रीय सहयोग तथा क्षमता निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी।

विशेष उल्लेख: इस राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के ऊर्जा विभागों, पावर मैनेजमेंट कंपनियों, डिस्कॉम्स, नियामक संस्थाओं तथा प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों की व्यापक भागीदारी रही, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण आधारित विद्युत क्रय, संसाधन पर्याप्तता, मांग पूर्वानुमान तथा ऊर्जा संक्रमण से जुड़े महत्वपूर्ण विचार एवं सुझाव प्राप्त हुए।