सबरीमला तंत्री की गिरफ्तारी पर सियासी घमासान तेज, केरल सरकार ने साजिश के आरोप खारिज किए

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तिरुवनंतपुरम, 21 फरवरी (आईएएनएस)। सबरीमला के तंत्री की कथित सोना चोरी मामले में गिरफ्तारी को लेकर केरल में सियासी विवाद गहरा गया है। विजयन सरकार ने इसे साजिश बताने के आरोपों को खारिज कर दिया है, जबकि विपक्ष ने तंत्री की 40 दिनों की जेल हिरासत की परिस्थितियों की हाईकोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है।

कानून मंत्री पी. राजीव ने गिरफ्तारी को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में किसी भी स्तर पर हस्तक्षेप नहीं किया। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी स्पष्ट साक्ष्यों के आधार पर की गई थी और साजिश के आरोप निराधार हैं।

यह विवाद सबरीमला सोना चोरी मामले में तंत्री कंतारार राजीवरु की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुआ। अपनी जमानत याचिका में तंत्री ने आरोप लगाया था कि उनकी गिरफ्तारी के पीछे सत्तारूढ़ व्यवस्था की नाराजगी थी, क्योंकि उन्होंने सबरीमला में महिलाओं के प्रवेश का विरोध किया था।

कोल्लम सतर्कता अदालत ने इस सप्ताह की शुरुआत में उन्हें जमानत दे दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि चोरी से उनका कोई सीधा संबंध साबित करने वाला साक्ष्य नहीं है।

विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने अब मांग की है कि एसआईटी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे कि तंत्री पर आखिर कौन-सा सटीक अपराध लगाया गया था और उनकी गिरफ्तारी का आधार क्या था। विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह कदम सीपीआई(एम) के खिलाफ उठे आरोपों से ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया था।

विपक्ष ने सोशल मीडिया पर कुछ पार्टी समर्थकों की उन पोस्टों का भी उल्लेख किया, जिनमें इस गिरफ्तारी को मुख्यमंत्री की “उपलब्धि” बताया गया था।

विपक्ष ने 11 जनवरी को ही इस मामले में किसी भी आरोपी चाहे वह मंत्री हो या तंत्री की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की थी। विपक्ष ने कहा, “यदि उन्होंने कोई गलत काम किया है तो उन्हें जेल में रहना चाहिए, लेकिन जनता को इसके बारे में स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।” साथ ही, पूरे घटनाक्रम की हाईकोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग दोहराई गई।

हालांकि एसआईटी ने शुरुआत में जमानत आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने पर विचार किया था, लेकिन अब उसने यह कदम टाल दिया है। बताया जा रहा है कि तंत्री को निशाना बनाने की धारणा से बचने के लिए यह फैसला लिया गया।

जांच पहले से ही न्यायिक निगरानी में है, फिर भी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार पर गिरफ्तारी और उसके बाद की घटनाओं को लेकर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।