शिलांग, 1 मई (आईएएनएस)। पूरे मेघालय में शुक्रवार को जनगणना 2027 के लिए स्व-गणना शुरू हो गई, जो भारत की पहली पूरी तरह से डिजिटल जनगणना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मेघालय के जनगणना संचालन निदेशक बिस्वजीत पेगु ने जनगणना 2027 को एक ऐतिहासिक प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि यह कुल मिलाकर 16वीं और स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी।
उन्होंने बताया कि पूरे राज्य में लगभग 9,000 गणनाकारों और पर्यवेक्षकों को तैनात किया जाएगा, जिन्हें डाटा संग्रह में सटीकता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत बहुस्तरीय निगरानी प्रणाली का सहयोग मिलेगा।
मेघालय की प्रशासनिक सीमाओं को जनगणना के लिए 31 दिसंबर, 2025 तक स्थिर कर दिया गया है। अधिकारी ने बताया कि यह काम डिप्टी कमिश्नरों की देखरेख में किया जाएगा, जो मुख्य जनगणना अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। इसमें चार्ज अधिकारियों, पर्यवेक्षकों और गणनाकारों का भी सहयोग मिलेगा।
जनगणना अधिकारियों ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे स्व-गणना प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें और क्षेत्रीय कर्मचारियों को पूरा सहयोग दें, ताकि राज्य में समावेशी विकास और साक्ष्य-आधारित शासन के लिए सही और व्यापक डाटा मिल सके।
इस जनगणना की एक मुख्य विशेषता बताते हुए पेगु ने कहा कि पहली बार पूरी प्रक्रिया गिनती से लेकर डाटा विश्लेषण तक मोबाइल ऐप और जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली (सीएमएमएस) पोर्टल का उपयोग करके डिजिटल रूप से पूरी की जाएगी।
नागरिक 1 मई से 15 मई तक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्व गणना का विकल्प चुन सकते हैं। इस सुविधा से लोग अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं भर सकते हैं, जिसकी बाद में गणनाकार घर-घर जाकर पुष्टि करेंगे। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से पारदर्शिता, सटीकता और जनभागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।
जनगणना 2027 दो चरणों में की जाएगी। पहले चरण में स्व-गणना और मकान सूचीकरण (एचएलओ) का काम शामिल है। स्व-गणना की अवधि समाप्त होने के बाद 16 मई से 14 जून तक एचएलओ का कार्य किया जाएगा। इस दौरान गणनाकार 33 प्रश्नों वाली एक तय प्रश्नावली के जरिए आवास की स्थिति, संपत्ति और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा डाटा इकट्ठा करेंगे।
चरण 2, यानी जनसंख्या गणना चरण, फरवरी 2027 के लिए निर्धारित है और इसकी संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 तय की गई है।
पेगू ने इस प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले कानूनी ढांचे पर भी प्रकाश डाला और बताया कि जनगणना, जनगणना अधिनियम 1948 और जनगणना नियम 1990 के प्रावधानों के तहत की जाती है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल बदलाव से मोबाइल ऐप में पहले से लोड प्रश्नावली के माध्यम से डाटा की गुणवत्ता बेहतर होगी और परिणामों को समय पर जारी करने के लिए डाटा प्रोसेसिंग में तेजी आएगी।
कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताते हुए अधिकारी ने कहा कि डाटा संग्रह समर्पित मोबाइल ऐप्स का उपयोग करके किया जाएगा, जिन्हें गणनाकार और पर्यवेक्षक स्मार्टफोन पर चलाएंगे।
सीएमएमएस पोर्टल सभी गतिविधियों की देखरेख करेगा, जिसमें प्रशिक्षण, निगरानी और एचएलबी क्रिएटर (एचएलबीसी) के माध्यम से जियो-कोडेड हाउस लिस्टिंग ब्लॉक बनाना शामिल है। स्व-गणना के माध्यम से जमा किए गए डाटा को अंतिम रूप से जमा करने से पहले फील्ड विजिट के दौरान सत्यापित किया जाएगा।
डाटा सुरक्षा के मामले में पेगु ने आश्वासन दिया कि गोपनीयता बनाए रखने के लिए कड़े सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। व्यक्तिगत और घरेलू स्तर का डाटा गोपनीय रहेगा और केवल समेकित डाटा ही नीति निर्माण और विकास योजना के लिए जारी किया जाएगा।
इस प्रक्रिया के दौरान एकत्र किए गए मोबाइल नंबरों का उपयोग केवल संचार और सत्यापन के लिए किया जाएगा। जनगणना में सभी सामान्य और संस्थागत परिवारों को शामिल किया जाएगा। हालांकि, कुछ विशेष श्रेणियों जैसे विदेशी नागरिक और राजनयिक कर्मियों को ‘मकान सूचीकरण’ चरण के दौरान इससे बाहर रखा जाएगा।
मेघालय के जनगणना संचालन निदेशालय के संयुक्त निदेशक सुभाशीष चटर्जी ने घोषणा की कि जनगणना 2027 से पहले नागरिकों की सहायता के लिए एक राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन (1855) शुरू की गई है।
यह हेल्पलाइन जनगणना प्रक्रिया से जुड़े सवालों के जवाब देगी, जिसमें घरों की सूची बनाना और जनसंख्या की गिनती शामिल है। साथ ही, यह सही और समय पर जानकारी देने में मदद करेगी और लोगों की समस्याओं का समाधान करेगी।
अधिकारियों ने जन-जागरूकता के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि मीडिया पेशेवर सही जानकारी फैलाने, गलतफहमियों को दूर करने और नागरिकों को जनगणना 2027 में आत्मविश्वास के साथ और सही तरीके से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

