बाल आयोग ने देहरादून के मदरसा का किया औचक निरीक्षण, मिले बिहार और अन्य राज्यों के बच्चे

0
5

देहरादून, 9 मई (आईएएनएस)। देहरादून के मदरसा इमदादूल उलूम का बाल आयोग की टीम ने शुक्रवार को निरीक्षण किया। इस दौरान आयोग ने पाया कि मदरसे में बिहार समेत अन्य राज्यों के बच्चों की बड़ी संख्या है। बेसमेंट में क्षमता से अधिक बच्चों वाले छोटे हॉस्टल और अग्नि सुरक्षा व नक्शा स्वीकृति की कमी पाई गई। यही नहीं, छोटे से हॉस्टल में बड़ी संख्या में बिहार और अन्य राज्यों के बच्चे मिले, जबकि स्थानीय बच्चों की संख्या कम थी।

बाल आयोग अध्यक्ष गीता खन्ना ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों और प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर कार्रवाई करने की बात कही है।

एक प्रतिष्ठित एनजीओ की ओर से मदरसे में बड़ी संख्या में बिहार और अन्य प्रदेशों के बच्चे, यौन शोषण की शिकायत पर शुक्रवार को उत्तराखड़ राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग की टीम ने मदरसा इमदादूल उलूम किशनपुर का निरीक्षण किया। इस दौरान मदरसे में नक्शा और अग्नि सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं पाए गए। इसके साथ ही आसपास बहुत गंदगी मिली।

बाल आयोग की अध्यक्षा गीता खन्ना ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए बताया कि जब निरीक्षण के लिए पहुंचे तो शुक्रवार के कारण मदरसा बंद था। पता चला कि हॉस्टल में 85 बच्चे रहते हैं। जैसे हम हॉस्टल में घुसे, तो बच्चे खुले में नहा रहे थे। जांच में बाथरूम भी सही नहीं मिला। मदरसे के बेसमेंट में हॉस्टल संचालित कर बेहद छोटे कमरों में बच्चों को रखा जा रहा है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा व स्वास्थ्य के प्रति गंभीर लापरवाही सामने आई। यहां रहने वाले बच्चे बिहार के एक खास जिले के रहने वाले थे। अधिकतर मदरसों में बिहार के बच्चे ही पाए जाते हैं, यह समझ से परे है। बच्चों ने बातचीत के दौरान बताया कि उनके माता-पिता जीवित हैं। उन्हें यहां बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेजा गया है।

डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि मदरसा संचालक ने पुलिस और बाल आयोग सहित अन्य किसी विभाग को सूचना नहीं दी है कि दूसरे राज्यों के बच्चे उनके यहां रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। निरीक्षण में रसोई बहुत ही गंदा मिला। मदरसे में किस प्रकार का वातावरण है? बच्चों की शिक्षा, खाना-पान और मानसिक स्थिति जांच के दायरे में है। किसी भी स्थिति में बच्चों का गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। संबंधित विभाग व प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बाल आयोग की अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि आखिर उत्तराखंड में बिहार के बच्चे क्यों रह रहे हैं, जबकि बिहार में गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए बेहतर व्यवस्था है। क्या यह कहीं मानव तस्करी तो नहीं है?

डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि राज्य में संचालित सभी प्रकार के हॉस्टलों के लिए स्पष्ट नियमावली बनाया जरूरी हो गया है। वहीं, स्कूल हॉस्टलों पर लागू सुरक्षा एवं संचालन संबंधी नियम सभी संस्थानों पर बराबर लागू होने चाहिए। सभी हॉस्टलों का पंजीकरण अनिवार्य होना चाहिए।

डॉ. गीता खन्ना ने बताया कि डिस्ट्रिक्ट प्रोबिशन ऑफिसर से पूछा है कि क्या उन्हें मदरसे में बच्चों को रखने की जानकारी है। एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग से भी बात की। वहीं, एसएसपी ने बात की तो उन्होंने कहा कि जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज चाहिए। इसके बाद मैंने मजिस्ट्रेट को पत्र लिखकर जांच करने की मांग की है कि मदरसे के वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उनके रिहायशी इलाके में लगे सीसीटी कैमरे यह दिखाएं कि वहां किस तरह के लोग आ-जा रहे हैं, क्योंकि दो साल पहले जब हमने एक मदरसे से एक डीवीआर बरामद किया था तो उससे पता चला था कि बच्चों के साथ शारीरिक दुर्व्यवहार किया जा रहा था, उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव हो रहा था और उनके साथ बेहद अनुचित तरीके से पेश आया जा रहा था।”

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि प्रदेश में अब कोई अवैध मदरसे की जगह नहीं है। बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मदरसा में बेहतर प्रबंध किया है। उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त कर दिया गया है। अब मदरसे में पढ़ने वाला बच्चा भी 8 से 1 बजे तक उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद का पाठ्यक्रम पढ़ेगा। इस पाठ्यक्रम से बच्चा सभी धर्मों और संस्कृति को समझेगा। जहां-जहां मदरसों की शिकायतें आ रही हैं, उनकी प्रबंध समिति को बदला जाएगा। मदरसों में बच्चों के साथ गलत व्यवहार करने वाले लोगों के खिलाफ वक्फ बोर्ड सख्त कार्रवाई करेगा।