सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों का निपटारा होगा: वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष अग्रवाल

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मिर्जापुर, 17 मई (आईएएनएस)। देश की न्याय व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति ने ‘सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026’ जारी किया है, जिसके तहत अब सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या में बढ़ोतरी का स्वागत किया।

वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाए जाने के फैसले से लंबित मामलों को कम करने में काफी मदद मिलेगी और न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी। सुप्रीम कोर्ट की तरह इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी जजों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जजों की संख्या बढ़ने से देशवासियों पर निश्चित रूप से सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट में हजारों मुकदमे लंबित हैं। जजों की संख्या बढ़ने से इन लंबित केसों का निपटारा शीघ्र होगा, लंबित अपीलों की सुनवाई भी तेजी से होगी। देशभर में जो अन्य महत्वपूर्ण मामले लंबित हैं, उनका भी शीघ्र निस्तारण संभव हो सकेगा। हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में आने वाले मामलों का निपटारा भी तेजी से होगा। राष्ट्रपति का यह कदम अत्यंत सराहनीय है। यह कदम बहुत जरूरी था। मैं यह भी चाहता हूं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी जजों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि लोवर कोर्ट से आने वाले लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जा सके।

बता दें कि यह अध्यादेश केंद्र सरकार के उस फैसले के कुछ ही दिनों बाद आया, जिसमें केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में चार नए जजों के पद बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे पहले 5 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में ‘सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ को संसद में पेश करने का फैसला लिया गया था। सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में लगातार बढ़ते कामकाज और लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए यह कदम जरूरी हो गया था। नए जजों की नियुक्ति से अदालत की कार्यक्षमता बढ़ेगी और सुनवाई में हो रही देरी को कम करने में मदद मिलेगी।

भारत में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा पहला कानून वर्ष 1956 में बनाया गया था। इसके बाद समय-समय पर न्यायपालिका की बढ़ती जरूरतों के अनुसार जजों की संख्या में बदलाव किया जाता रहा है। इससे पहले वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी। अब नए अध्यादेश के बाद सुप्रीम कोर्ट में कुल स्वीकृत जजों की संख्या, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सहित, 38 हो जाएगी। इसे देश की न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत करने तथा लोगों को समय पर न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।