Wednesday, June 24, 2026
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आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने लॉकअप में मौत के मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली पीआईएल पर सुनवाई टाली

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अमरावती, 24 जून (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को 25 वर्षीय गाडे साईं कृष्णा की कथित तौर पर कस्टडी में हुई मौत के मामले में सीबीआई जांच के आदेश की मांग करने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई टाल दी।

विजयवाड़ा में पिछले महीने कृष्णा लंका पुलिस द्वारा उठाए गए एक युवक के लापता होने के मामले में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) से जांच कराने के आदेश की मांग करते हुए हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है।

एडवोकेट जनरल ने डिवीजन बेंच को बताया कि इस घटना की पूरी जांच के लिए सीनियर अधिकारियों वाली एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाई गई है।

कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार जांच को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी कदम उठा रही है।

एजी ने कोर्ट का ध्यान इस बात की ओर भी दिलाया कि इस मामले में आरोपी सस्पेंडेड सर्कल इंस्पेक्टर (स्टेशन हाउस ऑफिसर) एस.एस.वी.वी नागराजू को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि आरोपी पुलिस अधिकारी को कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।

डिवीजन बेंच ने सुनवाई को 6 जुलाई तक टालते हुए कहा कि देखते हैं आगे क्या होता है।

एसआईटी ने मंगलवार को पूछताछ के लिए सस्पेंडेड एसएचओ नागराजू को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

यह गिरफ्तारी राज्य सरकार द्वारा इंस्पेक्टर जनरल (लॉ एंड ऑर्डर) एम. रवि प्रकाश की अध्यक्षता में एसआईटी गठित करने के दो दिन बाद हुई।

एसआईटी में वेस्ट गोदावरी के सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस अदनान नईम अस्मी और अल्लूरी सीतारामाराजू के एसपी अमित बरदार सदस्य हैं, और बापटला जिले के एडिशनल एसपी एल. सुधाकर जांच अधिकारी हैं। यह टीम सस्पेंडेड एसएचओ के खिलाफ गलत तरीके से हिरासत में रखने, हत्या और सबूत मिटाने के आरोपों की जांच कर रही है।

साईं कृष्णा की मां विजया लक्ष्मी की शिकायत पर 19 जून को भारत न्याय संहिता (बीएनएस की विभिन्न धाराओं 127 (4), 127 (6), 103 (1) और 238 के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके बेटे को हिरासत में टॉर्चर किया गया और पीट-पीटकर मार डाला गया।

उनके अनुसार, पुलिस ने एक मामले में पूछताछ के लिए 9 मई को साईं कृष्णा को उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया और पुलिस स्टेशन में कस्टोडियल टॉर्चर का शिकार बनाया गया।