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हैदराबाद: लोक अदालत के दौरान 1.51 लाख समझौता-योग्य आपराधिक मामलों का निपटारा

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हैदराबाद, 13 सितंबर (आईएएनएस)। हैदराबाद में आयोजित तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान 1.51 लाख से ज्यादा समझौता-योग्य आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया। रविवार को तेलंगाना पुलिस की ओर से बताया गया कि साइबर धोखाधड़ी के 3,896 मामले भी शामिल थे।

तेलंगाना पुलिस के मुताबिक, राज्य भर में कई तरह के सुलह-योग्य मामलों को आपसी समझौते से निपटाने के लिए आयोजित नेशनल लोक अदालत के दौरान कुल 151,164 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। इस पहल का मकसद अदालतों में लंबित मामलों की संख्या कम करना और साथ ही मुकदमेबाजी करने वालों का कीमती समय और पैसा बचाना था।

डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) के कार्यालय से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, नेशनल लोक अदालत ने राज्य भर में कई तरह के कानूनी विवादों को सुलझाकर और साइबर धोखाधड़ी के पीड़ितों को आर्थिक राहत देकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की।

लोगों को इस मौके का पूरा फायदा उठाने और अपने मामलों को कुशलतापूर्वक और तेजी से निपटाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए, पुलिस विभाग ने निपटारे के लिए योग्य सुलह-योग्य मामलों की पहचान की और दोनों पक्षों को नोटिस भेजे।

सीआईडी के डीजी के अनुसार, निपटारे की प्रक्रिया 3 सितंबर को शुरू हुई और 12 सितंबर को पूरी हुई। इस प्रक्रिया के दौरान कुल 1,51,164 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया, जिनमें साइबर धोखाधड़ी के 3,896 मामले शामिल थे। निपटारा किए गए मामलों में 21,843 एफआईआर मामले, 1,404 आपदा प्रबंधन मामले, 61,052 छोटे-मोटे मामले और 62,969 मोटर वाहन अधिनियम के मामले शामिल हैं।

साइबर अपराध के 3,896 मामलों के निपटारे में कुल 42.29 करोड़ रुपये वापस किए गए। नेशनल लोक अदालत के दौरान मामलों के निपटारे में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली पांच इकाइयां थीं। हैदराबाद (15,944 मामले), खम्मम (10,955 मामले), गडवाल (8,469 मामले), वारंगल (8,404 मामले), और मल्कजगिरी (8,109) मामलों का निपटारा किया गया।

तेलंगाना भर की सभी पुलिस इकाइयों ने नेशनल लोक अदालत के दौरान सुलह योग्य मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों का निपटारा तेलंगाना राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण, जिला न्यायाधीशों, मजिस्ट्रेटों, जिला कानूनी सेवा प्राधिकरणों, पुलिस आयुक्तों और जिला पुलिस अधीक्षकों के संयुक्त और समन्वित प्रयासों से संभव हो सका।