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दिशा सालियान केस में पेनड्राइव और डिजिटल सबूत से खुलेगा राज: वकील नीलेश ओझा

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मुंबई, 15 सितंबर (आईएएनएस)। दिशा सालियान केस में सीबीआई की एफआईआर के बाद सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने कहा है कि मामले में हाईकोर्ट के आदेश से ही जांच के करीब 80 फीसदी पहलू स्पष्ट हो चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि हाईकोर्ट के आदेश में ऐसे 10 बिंदुओं का उल्लेख है, जिनसे पुलिस की पूर्व रिपोर्ट पर सवाल उठते हैं। अब दिशा के पिता सतीश सालियान की ओर से दिए गए बयानों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सीबीआई के सामने रखा जा रहा है।

नीलेश ओझा ने कहा कि सतीश सालियान ने अपने बयान में कई महत्वपूर्ण जानकारियां विस्तार से दी हैं, जिनका उल्लेख एफआईआर में भी है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कुछ अतिरिक्त सामग्री भी मौजूद है, जिसे जांच एजेंसी को सौंपने की तैयारी की जा रही है। एक प्रत्यक्षदर्शी की गवाही से संबंधित पेनड्राइव या अन्य डिजिटल साक्ष्य कवरिंग लेटर के साथ सीबीआई को सौंपने का प्रयास किया जा रहा है।

ओझा ने दावा किया कि ये सामग्री आदित्य ठाकरे और अन्य लोगों से जुड़े आरोपों की जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने कहा कि सीबीआई के पास पहले से भी इस मामले से संबंधित काफी सामग्री है। साथ ही उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत मामले से जुड़े कुछ पहलुओं का भी जिक्र किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक प्रत्यक्षदर्शी ने शुरुआत से ही पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए थे। उन्होंने पूर्व पुलिस अधिकारियों और पुलिस व्यवस्था से जुड़े लोगों के संबंध में भी गंभीर आरोप लगाए।

ओझा ने दिशा के बचपन के दो दोस्तों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सतीश सालियान का इन दोनों के प्रति पारिवारिक लगाव है, क्योंकि वे बचपन से दिशा के घर आते-जाते थे। वकील के मुताबिक, एक कथित प्रत्यक्षदर्शी ने उस समय यह भी कहा था कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ लड़ना मुश्किल होगा। ओझा ने कहा कि मामले के बाकी तथ्य अब सीबीआई की जांच में सामने आने चाहिए।

जांच के तरीके को लेकर नीलेश ओझा ने कहा कि यदि वे जांच अधिकारी होते तो घटनास्थल पर मौजूद लोगों और सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों को अलग-अलग बुलाकर पूछताछ करते। सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुराने बयानों में विरोधाभास सामने आने पर संबंधित लोगों से पूछा जा सकता है कि वे गवाह बनकर सच बताना चाहते हैं या आरोपी के रूप में जांच का सामना करना चाहते हैं।

सचिन वाझे के कथित तौर पर गवाह बनने की इच्छा जताने के सवाल पर ओझा ने कहा कि उनकी ओर से पहले भी प्रस्ताव आया था। वाझे ने दिशा सालियान और सुशांत सिंह राजपूत मामलों से संबंधित जानकारी होने की बात कही थी। ओझा ने एक अन्य पुलिस अधिकारी का भी जिक्र किया और कहा कि 25 अगस्त को एनआईए कोर्ट में हुई कार्यवाही के दौरान सचिन वाझे से संबंधित कुछ बातें सामने आई थीं। उन्होंने वाझे द्वारा परमबीर सिंह के कथित निर्देशों का उल्लेख किए जाने का दावा किया, लेकिन कई अन्य जानकारियां जांच प्रभावित होने की आशंका के चलते सार्वजनिक नहीं करने की बात कही।

ओझा ने आगे कहा कि उपलब्ध सामग्री सीबीआई को सौंपना जरूरी है ताकि एजेंसी स्वतंत्र रूप से जांच कर सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब जांच एजेंसी को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करने दी जानी चाहिए।