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चुनाव आयोग में अंदरूनी मतभेद पर मनीष तिवारी ने सीईसी के इस्तीफे की मांग की, जेपीएससी जांच की मांग

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नई दिल्ली, 24 सितंबर (आईएएनएस)। चुनाव आयोग में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर फैसलों पर अंदरूनी आपत्ति की खबरों के बीच कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने इसे गंभीर मामला बताया है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

मनीष तिवारी ने चुनाव आयोग के कामकाज की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की भी मांग की है।

मनीष तिवारी ने आईएएनएस से बात कहते हुए 1993 में चुनाव आयुक्त जीवीके कृष्णमूर्ति और सरदार मनोहर सिंह गिल की नियुक्ति का जिक्र किया, जिसे तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।उस समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जो भी होगा, वह पूरी सहमति के बाद होना चाहिए या अगर सहमति नहीं बनती है तो चीजों का फैसला बहुमत से होना चाहिए। फैसले इसी आधार पर लिए जाएंगे।”

उन्होंने कहा, “अब अगर दो चुनाव आयुक्त कह रहे हैं कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा लिए गए फैसलों से सहमत नहीं थे, तो वे फैसले अवैध और असंवैधानिक हैं।”

मनीष तिवारी ने यह भी दावा किया कि एसआईआर की वजह से करीब 13 करोड़ लोगों को वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। उन्होंने इसे दुनिया का सबसे बड़ा मताधिकार छीनने का मामला बताया।

उन्होंने कहा, “अगर एसआईआर की वजह से 13 करोड़ लोगों को उनके वोटिंग अधिकार से हटाया गया तो दुनिया में सबसे बड़ा मताधिकार छीनना हुआ होगा। हटाए गए लोगों की संख्या कई देशों की आबादी से भी ज्यादा है।”

उन्होंने कहा, “यह एक गंभीर मामला है। खुलासे के बाद ईसीआई ने आरोपों को खारिज भी नहीं किया और अजीब बयान दिए। ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर वह इस्तीफा नहीं देते हैं तो चुनाव आयोग के कामकाज की जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “पहले बाहर के लोगों ने सवाल उठाए थे, लेकिन इस बार सवाल अंदर से उठ रहे हैं। सवाल काफी गंभीर हैं।”

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी वाले एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री पर प्रतिक्रिया देते हुए मनीष तिवारी ने कहा कि व्यंग्य लोकतांत्रिक चर्चा का अहम हिस्सा है।

उन्होंने कहा, “आजकल दुर्भाग्यपूर्ण बात ये है कि हर चीज के बारे में बहुत ही संकीर्ण नजरिए से राय बनाई जाती है। किसी भी लोकतांत्रिक देश के संदर्भ में व्यंग्य एक अभिन्न अंग है। अगर आप इस देश के संदर्भ और सार्वजनिक चर्चा से व्यंग्य को पूरी तरह से हटाना चाहते हैं, तो यह आपकी सोच हो सकती है, लेकिन यह देश की सोच नहीं है।”

उन्होंने कहा, “अगर आप भारत के लोकतांत्रिक इतिहास को देखें, तो आजादी के आसपास भी उस समय की सत्तारूढ़ पार्टियों के खिलाफ व्यंग्य का इस्तेमाल किया गया था। अखबारों और टीवी चैनलों ने भी कार्टून और व्यंग्य का इस्तेमाल किया है। हालांकि एक बात और महत्वपूर्ण है कि इसकी एक सीमा और मर्यादा होनी चाहिए।”

पंजाब में ड्रग्स की समस्या से जुड़ी आत्महत्याओं पर बोलते हुए तिवारी ने कहा कि 1995 में पंजाब में आतंकवाद पर काबू पाने के बाद पाकिस्तान ने भारत को निशाना बनाने के लिए एक अलग रणनीति अपनाई। उन्होंने कहा कि मकसद किसी तरह भारत की युवा पीढ़ी को नशीले पदार्थ मुहैया कराकर उनकी क्षमता, ऊर्जा और जवानी को खत्म करना था।