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केपीएससी एसआईटी पर हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी कर्नाटक सरकार; भाजपा ने उठाए सवाल

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बेंगलुरु, 24 सितंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार, कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) में वेटनरी ऑफिसर की भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाने के हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही है। हाई कोर्ट ने इस टीम में शामिल किए जाने वाले खास अधिकारियों को खुद चुना था।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार को एसआईटी जांच से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्होंने कुछ खास अधिकारियों को नियुक्त करने के निर्देश पर सवाल उठाए।

शिवकुमार ने कहा था, “हमें एसआईटी बनाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार को खास अधिकारियों को नियुक्त करने का निर्देश देना गलत संदेश देता है।”

हालांकि, गुरुवार को भाजपा ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए और जानना चाहा कि वह कोर्ट की निगरानी में होने वाली जांच का विरोध क्यों कर रही है।

राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के 21 सितंबर के उस आदेश को चुनौती देते हुए स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) दायर करने का फैसला किया है, जिसमें सीनियर आईपीएस अधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एसआईटी बनाने का निर्देश दिया गया था। यह फैसला कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने और टीम में खास अधिकारियों की नियुक्ति पर आपत्ति जताने के बाद लिया गया। सरकार ने कोर्ट पर न्यायिक अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम करने (जुडिशियल ओवररीच) का आरोप भी लगाया।

हाई कोर्ट के आदेश के तहत, एसआईटी को कथित अनियमितताओं की नई जांच करने और 100 दिनों के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया है। सीआईडी, जो पहले इस मामले की जांच कर रही थी, उसे संबंधित दस्तावेज और जांच सामग्री एसआईटी को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

सरकार ने नई जांच की जरूरत पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सीआईडी की जांच पहले ही लगभग 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। सरकार ने बताया है कि गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं, सबूत और दस्तावेज इकट्ठा किए जा चुके हैं, पैसे जब्त किए जा चुके हैं और सीसीटीवी फुटेज समेत तकनीकी सबूतों की जांच की जा चुकी है।

सरकार ने एसआईटी में खास अधिकारियों की नियुक्ति के हाई कोर्ट के निर्देश पर भी आपत्ति जताई है।

हाई कोर्ट के आदेश के तहत, ज्ञानेंद्र कुमार के केपीएससी कंट्रोलर रहने के दौरान आयोजित केएएस और असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (एईई) भर्ती सहित अन्य केपीएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की भी जांच होने की उम्मीद है।

जांच का दायरा बढ़ने से पिछले तीन-चार वर्षों में कई भर्ती प्रक्रियाएं जांच के दायरे में आ सकती हैं। इस बीच, विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सुप्रीम कोर्ट जाने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाए।

अशोक ने एक बयान में पूछा, “सरकार हाई कोर्ट द्वारा नियुक्त एसआईटी से इतनी डरी हुई क्यों है? आप सुप्रीम कोर्ट में अपील करके किसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं?”

अशोक ने आरोप लगाया कि सरकार केपीएससी वेटरनरी ऑफिसर भर्ती मामले से जुड़ी सच्चाई को सामने आने से रोकने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने पूछा, “अगर आपके मंत्रियों, विधायकों और नेताओं ने कुछ गलत नहीं किया है, तो एसआईटी से यह डर क्यों?”

भाजपा नेता ने यह भी सवाल उठाया कि जब सीआईडी पहले से ही इस मामले की जांच कर रही थी, तो सरकार हाई कोर्ट के आदेश से हो रही जांच को चुनौती क्यों दे रही है।

अशोका ने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट की देखरेख में होने वाली जांच से भर्ती प्रक्रिया में प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं, मंत्रियों और कथित बिचौलियों की भूमिका (अगर कोई हो) का पता चल सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह एसआईटी के गठन को चुनौती देने के बजाय उसके साथ सहयोग करे।

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि भर्ती में कथित अनियमितताओं ने नौकरी के उम्मीदवारों के भविष्य पर असर डाला है और उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

हाई कोर्ट ने 400 वेटनरी अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की नई जांच का आदेश दिया था और सीनियर आईपीएस अधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। टीम को हर 30 दिन में प्रोग्रेस रिपोर्ट सौंपने और 100 दिनों के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया था।

भर्ती मामले में लगे आरोपों में प्रश्न-पत्र लीक होने, चयन के लिए पैसे के लेन-देन, बिचौलियों की भूमिका और परीक्षा रिकॉर्ड में हेरफेर जैसे दावे शामिल हैं। ये आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और इनमें शामिल बताए गए सभी लोगों के खिलाफ आपराधिक अपराध साबित नहीं हुए हैं।