नई दिल्ली, 24 सितंबर (आईएएनएस)। चुनाव आयोग द्वारा लिए गए फैसलों पर दो चुनाव आयुक्तों के 14 बार आपत्ति जताने को लेकर सामने आई रिपोर्ट पर सियासत गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अपने स्वार्थ और भाजपा के इशारे पर पूरे सिस्टम में हेरफेर किया है।
मनोज झा ने गुरुवार को आईएएनएस से कहा, “चुनाव आयोग को लेकर खुलासे कल ही नहीं हुए बल्कि आज भी हुए हैं। ये सिर्फ खुलासे नहीं हैं। ये साफ तौर पर बता रहे हैं कि एक व्यक्ति ने अपने स्वार्थवश या किसी रसूखदार के कहने पर पूरे सिस्टम में कैसे हेरफेर किया और चुनावी नियमों की पवित्रता को तहस-नहस कर दिया। चाहे गोवा का मामला हो, बंगाल का मामला हो या बिहार का मामला हो, हर जगह यही किया गया है।”
चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस नोट पर सवाल उठाते हुए मनोज झा ने कहा, “कल उनका प्रेस नोट देखा। पता नहीं किससे लिखवाया और कहां से लिखकर आया है। मीडिया रिपोर्ट्स ने जो सवाल उठाए थे, उस प्रेस नोट में एक भी सवाल का जवाब नहीं है।”
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगाते हुए कहा, “लोकतंत्र में असहमति होती है लेकिन ये तो बताइए कि असहमति के जो 14 बिंदु थे, जिनमें ज्यादातर संवैधानिक सवाल थे, उनको आपने कैसे सुलझाया? क्योंकि आप बॉस नहीं हैं, आप फर्स्ट अमंग इक्वल्स हैं। आपने इस बुनियादी सिद्धांत को ही खत्म कर दिया है। तो जाहिर तौर पर अब कुछ नहीं बचता है। जब भाजपा उनके प्रेस नोट से पहले ही बचाव करने आ जाती है, तब पता चलता है कि ये रिश्ता कितना गहरा है।”
इस बीच बिहार में महिलाओं के साथ बदसलूकी की हाल की घटनाओं पर मनोज झा ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जमुई के बाद दरभंगा में ऐसी कोशिश हुई जिसे एक-दो लोगों की पहल से रोक दिया गया, इसके बाद समस्तीपुर और फिर बुधवार रात पटना में घटना हुई।
उन्होंने कहा, “मैं बिहार सरकार से कोई सवाल नहीं पूछूंगा क्योंकि वह गुंडागर्दी के ढांचे पर ही टिकी हुई है। उनसे सवाल पूछेंगे तो केंद्रीय मंत्री आकर कहेंगे कि 2000 में क्या था, 1990-95 में क्या था? साहब, इतना ही रुकते क्यों हो, मोहनजोदड़ो काल में जाओ, वैदिक काल में जाओ और वहां से तुलना करो।”
उन्होंने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री अमित शाह से सवाल करते हुए कहा, “जब आप चुनाव में बिहार जाते हैं तो कितनी प्यारी-प्यारी बातें करते हैं। वह सारा प्यार खत्म हो गया क्या। बिहार को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है। कोई चिंता नहीं है कि गवर्नेंस का स्तर क्या है। आज हालत यह है कि आदमी घर से निकलने के बाद सुरक्षित लौटेगा या नहीं, इसके लिए प्रार्थना कर रहा है। क्या बनाकर रख दिया है?”
राम मंदिर चढ़ावा चोरी से जुड़ी चार्जशीट में चंपत राय को आरोपी नहीं बल्कि गवाह बनाए जाने पर भी मनोज झा ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “कमाल की बात है, जिन पर आरोप था वो गवाह हो गए। मैंने पहले भी कहा था कि छोटी मछलियां पकड़ी जाएंगी। उनके सामने कहानी बनाई जाएगी। तमाम बड़े लोग जिनकी ऊपर तक पहुंच है, उन्हें बचा लिया जाएगा। आस्था के नाम पर खिलवाड़ हो रहा है। मतलब आस्था के नाम पर वोट मांगो लेकिन उसी आस्था के नाम पर आम आदमी की आस्था के साथ खिलवाड़ करो और बड़े लोगों को महफूज रखो, यही इसका सार है।”
