नई दिल्ली, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने गुरुवार को शिक्षा में जल से जुड़े विषयों को शामिल करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन पर जोर दिया। इस विजन के तहत स्कूली पाठ्यक्रम में जल से संबंधित जानकारी शामिल की जाएगी और उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन और गवर्नेंस के कोर्स चलाए जाएंगे।
एम्पावर्ड टास्क फोर्स (ईटीएफ) की 20वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीआर पाटिल ने जोर दिया कि इस तरह की एकेडमिक पहल एक मजबूत नॉलेज बेस बनाने और ऐसे प्रोफेशनल्स का कैडर तैयार करने में योगदान दे सकती हैं, जो नदी प्रबंधन के इकोलॉजिकल, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और पॉलिसी से जुड़े पहलुओं को संभालने में सक्षम हों।
उन्होंने कहा कि नदी से जुड़े प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए शहर और राज्य स्तर पर इन कोर्स को बढ़ावा दिया जा सकता है, और इन कोर्स को करने वाले छात्रों पर शहरों में नदी से जुड़े कामों के लिए विचार किया जा सकता है।
उन्होंने नदियों के समग्र कायाकल्प के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया और नमामि गंगे कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की।
केंद्रीय मंत्री ने नदी के कायाकल्प में तेजी लाने के लिए अहम उपायों पर चर्चा की, जिनमें बेहतर सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, वैज्ञानिक जल प्रबंधन, ट्रीटेड वेस्टवॉटर का सुरक्षित दोबारा इस्तेमाल, इकोलॉजिकल बहाली, भूजल प्रबंधन, प्रकृति-आधारित समाधान और स्टेकहोल्डर्स के बीच बेहतर तालमेल शामिल हैं।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने और उसके मूल्यांकन, जमीन की उपलब्धता, ट्रीटेड वेस्टवॉटर के सुरक्षित दोबारा इस्तेमाल (एसआरटीडब्ल्यू), एक्विफर मैपिंग, वेटलैंड्स, सिटी सैनिटेशन एक्शन प्लान (सीएसएपी), एरियल ड्रेनेज मैपिंग और राज्य गंगा समितियों की नियमित बैठकों की स्थिति की समीक्षा की गई।
बताया गया कि बरौनी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए संशोधित डीपीआर मिल गई है और मूल्यांकन के लिए आईआईटी-बीएचयू भेजी गई है, जबकि पश्चिम बंगाल में शांतिपुर एसटीपी के लिए डीपीआर को कार्यकारी समिति ने मंजूरी दे दी है।
बिहार और पश्चिम बंगाल ने ट्रीटेड वेस्टवॉटर के दोबारा इस्तेमाल पर अपनी पॉलिसी नोटिफाई कर दी हैं, जबकि झारखंड राज्य कैबिनेट की मंजूरी लेने की प्रक्रिया में है।
बैठक में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत प्रोजेक्ट्स की कुल स्थिति और वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कार्यक्रम के प्रदर्शन की समीक्षा की गई।
अगस्त 2026 तक, कुल 43,266 करोड़ रुपए की लागत से 527 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 368 प्रोजेक्ट्स पूरे हो चुके हैं।
सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत, 219 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है, जिससे 6,603 एमएलडी की ट्रीटमेंट क्षमता और 5,245 किलोमीटर का सीवर नेटवर्क तैयार हुआ है। इनमें से 147 प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं, जिनसे 4,339 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बनी है और 4,615 किलोमीटर का सीवर नेटवर्क तैयार हुआ है।
इस बैठक में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, जल संसाधन विभाग की सचिव अर्चना वर्मा, पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीना और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल भी शामिल हुए।
