Monday, August 24, 2026
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महाराष्ट्र : सीबीआई ने वेस्टर्न कोलफील्ड्स के फोरमैन को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया

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नागपुर, 11 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) के एक फोरमैन इंचार्ज को एक माइनिंग सरदार और एक ओवरमैन के आपसी तबादलों से संबंधित 40,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

नीलजाई उपक्षेत्र स्थित नाइगांव ओपन कास्ट माइन में तैनात दीपक जायसवाल को खदान के एक क्लर्क कपिल लक्ष्मण नागराले द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के सत्यापन के बाद गिरफ्तार किया गया।

सीबीआई ने 9 जनवरी को शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने डब्ल्यूसीएल के दो अन्य कर्मचारियों के आपसी तबादलों की सुविधा प्रदान करने के लिए शिकायतकर्ता के माध्यम से 50,000 रुपए की रिश्वत, यानी प्रत्येक के लिए 25,000 रुपए की मांग की थी।

केंद्रीय एजेंसी ने बताया कि गोंडेगांव ओपन कास्ट खदान के खनन सरदार दिनेश गेदम से रिश्वत की मांग की गई थी। दिनेश, नागराले के रिश्तेदार हैं।

जिस ओवरमैन से जायसवाल ने रिश्वत की मांग की थी, वह उमरेड क्षेत्र के गोकुल ओपन कास्ट खदान का अरविंद कुडफे है।

सीबीआई ने बताया कि जयसवाल ने गेदम और कुडफे की ओर से नागराले से रिश्वत की मांग की, फिर उससे बातचीत की, और आरोपी रिश्वत के तौर पर 40,000 रुपए लेने पर सहमत हो गया, यानी दोनों कर्मचारियों के लिए 20,000 रुपये प्रति व्यक्ति।

इसी बीच, नागराले ने सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद सीबीआई ने शनिवार को जाल बिछाकर आरोपी को शिकायतकर्ता से 40,000 रुपए की रिश्वत मांगते और लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा।

जायसवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मंजूरी देते हुए सीबीआई के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ऋषिकेश सोनवाने ने कहा कि आरोपों की पुष्टि 9 जनवरी को दो स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में की गई। जांच में पता चला है कि दीपक जयसवाल ने दिनेश गेदम और अरविंद कुडफे के आपसी तबादलों का काम करवाने के लिए कपिल लक्ष्मण नागराले के माध्यम से 50,000 रुपए की रिश्वत की मांग की थी।

सीबीआई एसपी ने कहा कि बातचीत के बाद दीपक जायसवाल ने रिश्वत की रकम घटाकर कुल 40,000 रुपए कर दी।

सोनावाने ने आगे कहा कि इन तथ्यों से दीपक जायसवाल द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 7 के तहत दंडनीय संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है।