Tuesday, June 9, 2026
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भारत में खुलेंगे दुनिया के तीन और बड़े विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस

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नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके तहत विश्व के तीन प्रतिष्ठित विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस स्थापित करने के लिए स्वीकृति पत्र सौंपे गए हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की उपस्थिति में मंगलवार को शिक्षा मंत्रालय ने स्वीकृति पत्र सौंपे। इन विदेशी विश्वविद्यालयों में ब्रिस्टल विश्वविद्यालय, यॉर्क विश्वविद्यालय और न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय शामिल हैं।

भारत की ओर से ये स्वीकृति पत्र उच्च शिक्षा विभाग के सचिव एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनीत जोशी ने संबंधित विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों को प्रदान किए।

इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इन विश्वविद्यालयों का भारत में आगमन नई शिक्षा नीति 2020 के ‘अंतरराष्ट्रीयकरण’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे भारत में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा, वैश्विक शैक्षणिक साझेदारी और शोध सहयोग को नई गति मिलेगी।

उन्होंने बताया कि ब्रिस्टल और यॉर्क विश्वविद्यालय अपने परिसर मुंबई में स्थापित करेंगे, जबकि न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय बेंगलुरु में अपना परिसर शुरू करेगा। ये दोनों शहर देश के प्रमुख ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार केंद्रों के रूप में तेजी से उभर रहे हैं।

शिक्षा मंत्री ने बेंगलुरु को दुनिया के पूर्वी हिस्से की नई सिलिकॉन वैली बताते हुए कहा कि विदेशी विश्वविद्यालयों की मौजूदगी से भारत की वैश्विक शैक्षणिक पहचान और मजबूत होगी। ब्रिस्टल विश्वविद्यालय का मुंबई एंटरप्राइज परिसर इमर्सिव आर्ट्स, वित्त, डेटा साइंस, अर्थशास्त्र, व्यवसाय प्रबंधन, उद्यमिता और नवाचार जैसे क्षेत्रों में कार्यक्रम संचालित करेगा।

यॉर्क विश्वविद्यालय मुंबई में अपना पहला विदेशी परिसर स्थापित करेगा। यहां वित्त, एआई सहित कंप्यूटर विज्ञान, साइबर सुरक्षा, व्यवसाय, अर्थशास्त्र, रचनात्मक उद्योग और प्रबंधन जैसे विषयों में शिक्षा दी जाएगी। वहीं न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय का बेंगलुरु परिसर अगस्त 2026 से मान्यता बिजनेस पार्क में शुरू होने वाला है। यहां व्यवसाय, कंप्यूटर विज्ञान और साइबर सुरक्षा के अलावा नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य, परिवहन और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी भारत के साथ गहन सहयोग विकसित किया जाएगा।

शिक्षाविदों का मानना है कि इन परिसरों के खुलने से भारतीय छात्रों को विदेश गए बिना विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे शैक्षणिक आदान-प्रदान बढ़ेगा, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे।

विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए बनाए गए नए नियमों के तहत अब तक पांच विश्वविद्यालयों को स्वीकृति पत्र जारी किए जा चुके हैं। इनमें साउथैम्पटन विश्वविद्यालय और लिवरपूल विश्वविद्यालय शामिल हैं। साउथैम्पटन विश्वविद्यालय ने 2025-26 सत्र से भारत में अपनी शैक्षणिक गतिविधियां शुरू भी कर दी हैं।

इसके अलावा ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और इटली के कई प्रतिष्ठित संस्थानों को भारत में परिसर स्थापित करने के लिए आशय पत्र जारी किए जा चुके हैं। वहीं डीकिन विश्वविद्यालय, वोलोंगोंग विश्वविद्यालय और क्वीन्स विश्वविद्यालय बेलफास्ट पहले से ही गुजरात के गिफ्ट सिटी में संचालन कर रहे हैं।

शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि यह बढ़ती रुचि भारत की मजबूत शैक्षणिक व्यवस्था, अनुकूल नियामक ढांचे और तेजी से विकसित हो रहे ज्ञान-आधारित अर्थतंत्र में वैश्विक संस्थानों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। इससे भारत का उच्च शिक्षा परिदृश्य अधिक प्रतिस्पर्धी, समावेशी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बन सकेगा।