पटना, 6 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 12 जिलों के 70 प्रखंडों की 368 ग्राम पंचायतों में करीब 22.42 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। गंगा नदी पटना के गांधीघाट, पंडारक, दानापुर और बांका घाट में अपने पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) से ऊपर बह रही है। हालांकि, इन सभी स्थानों पर जलस्तर की प्रवृत्ति स्थिर बताई गई है।
केंद्रीय जल आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह 6 बजे पटना के गांधीघाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया, जो 21 अगस्त 2016 के 50.52 मीटर के पिछले एचएफएल से 0.05 मीटर ऊपर है। पंडारक में जलस्तर 43.92 मीटर रहा, जो 16 अगस्त 2021 के 43.73 मीटर के एचएफएल से 0.19 मीटर अधिक है। दानापुर में गंगा का जलस्तर 52.63 मीटर दर्ज किया गया, जो 15 अगस्त 2021 के 52.61 मीटर के पिछले एचएफएल से 0.02 मीटर ऊपर है।
वहीं, बांका घाट में जलस्तर 49.47 मीटर रहा, जो 16 अगस्त 2021 के 49.44 मीटर के एचएफएल से 0.03 मीटर अधिक है। राज्य के कई अन्य स्थानों पर भी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गंडक नदी डुमरिया घाट और हाजीपुर में, कोसी बलतारा और कुर्सेला में तथा बूढ़ी गंडक खगड़िया में खतरे के निशान से ऊपर है। इसके अलावा गंगा दीघा, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव, बक्सर और मुंगेर में, पुनपुन श्रीपालपुर में, बागमती बेनीबाद में तथा घाघरा दरौली और गंगपुर में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
उधर, बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं। बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए विभिन्न जिलों में 190 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। अब तक करीब 2.51 लाख लोगों को भोजन कराया जा चुका है। इसके अलावा तीन राहत शिविर चलाए जा रहे हैं, जहां 1,631 बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए आवासन, भोजन और चिकित्सा समेत अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच अब तक करीब 65,700 पॉलीथीन शीट और 12,700 ड्राई राशन पैकेट वितरित किए गए हैं।
आबादी के निष्क्रमण और आवागमन को सुगम बनाने के लिए 1,429 नावों का परिचालन कराया जा रहा है। नदियों के जलस्राव पर भी प्रशासन की नजर बनी हुई है। रविवार शाम 5 बजे वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक नदी का जलस्राव 1,29,000 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसकी प्रवृत्ति स्थिर रही। इस वर्ष 14 जुलाई को यहां अधिकतम 2,24,000 क्यूसेक जलस्राव दर्ज किया गया था। वीरपुर बराज पर कोसी नदी का जलस्राव शाम 5 बजे 2,20,025 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसकी प्रवृत्ति बढ़ने की बताई गई है। इस वर्ष 20 जुलाई को यहां अधिकतम 2,55,425 क्यूसेक जलस्राव दर्ज किया गया था।
इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का जलस्राव 1,80,384 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसकी प्रवृत्ति स्थिर रही। इस वर्ष 2 सितंबर को यहां अधिकतम 5,63,654 क्यूसेक जलस्राव दर्ज किया गया था। संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए त्वरित राहत एवं बचाव कार्य के लिए एसडीआरएफ की 27 और एनडीआरएफ की 10 टीमों को विभिन्न जिलों में प्रतिनियुक्त किया गया है। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों की निगरानी लगातार की जा रही है।
