SGSU Advertisement
Home राष्ट्रीय कॉकपिट सिक्योरिटी में चूक नहीं, पायलट ने प्रोफेशनल तरीके से संभाली स्थिति:...

कॉकपिट सिक्योरिटी में चूक नहीं, पायलट ने प्रोफेशनल तरीके से संभाली स्थिति: अमित मित्तल

0
3

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। फ्लाईदुबई की विमान एफजेड1073 में सामने आई घटना को लेकर एविएशन एक्सपर्ट और एरोइंटेललेक्ट एविएशन के डायरेक्टर अमित मित्तल ने कॉकपिट सिक्योरिटी और इमरजेंसी हैंडलिंग पर बात की। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्लाइट में पायलट इन कमांड और कैप्टन स्मित मच्छार पर उनके को-पायलट ने हमला किया था। इस दौरान स्थिति बिगड़ने के बाद कैप्टन को चोट लगी और फ्लाइट की ऊंचाई में भी अचानक बड़ी गिरावट दर्ज हुई।

अमित मित्तल ने बताया कि यह विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था। घटना के दौरान फ्लाइट करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई पर थी, लेकिन कुछ ही समय में यह लगभग 20 हजार फीट तक नीचे आ गई, यानी करीब 14 हजार फीट का डिसेंट हुआ। इसके बाद विमान में मौजूद ऐसे पायलटों ने स्थिति संभाली, जो उस समय ड्यूटी पर नहीं थे। उन्होंने एयरक्राफ्ट को स्थिर किया और उसे सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के एक एयरपोर्ट पर उतारा गया। इस पूरे घटनाक्रम में कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

उन्होंने कहा कि जब कॉकपिट के भीतर स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी तो कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोला। इसके बाद बाहर मौजूद लोगों और अन्य सक्षम पायलटों ने स्थिति को संभाला। इस तरह की स्थिति की सामान्य तौर पर कल्पना करना भी मुश्किल है कि को-पायलट ही पायलट इन कमांड पर हमला कर दे। यह एक असामान्य और चुनौतीपूर्ण परिस्थिति थी। इसके बावजूद उपलब्ध जानकारी के आधार पर कैप्टन ने सुरक्षा और सिक्योरिटी प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए विमान को सक्षम लोगों को सौंपने की स्थिति बनाई।

उन्होंने इसे इमरजेंसी हैंडलिंग का उदाहरण बताते हुए कहा कि पायलट ने ऐसी स्थिति को बहुत प्रभावी और प्रोफेशनल तरीके से संभाला, जिसकी सामान्य उड़ान संचालन में कल्पना नहीं की जाती। विमान को स्थिर करना और फिर सुरक्षित लैंडिंग तक पहुंचाना इस पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा रहा। कॉकपिट सिक्योरिटी के बारे में बताते हुए मित्तल ने कहा कि आधुनिक यात्री विमानों में कॉकपिट के दरवाजे मजबूत सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होते हैं। सामान्य परिस्थितियों में बाहर से कोई व्यक्ति पायलट की अनुमति के बिना कॉकपिट में प्रवेश नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि इस घटना में स्थिति अलग थी। केबिन से किसी यात्री या क्रू सदस्य द्वारा जबरन कॉकपिट में प्रवेश करने की कोशिश नहीं की गई थी। घटना की शुरुआत ही कॉकपिट के अंदर हुई थी और पायलट ने परिस्थितियों को देखते हुए खुद दरवाजा खोला। इसके बाद बाहर मौजूद लोगों और दूसरे पायलटों ने विमान को संभालने में भूमिका निभाई।

क्या इस घटना के बाद एयरलाइंस को कॉकपिट सिक्योरिटी प्रोटोकॉल की समीक्षा करनी चाहिए? इस सवाल पर अमित मित्तल ने कहा कि फिलहाल इसे कॉकपिट सिक्योरिटी में चूक नहीं माना जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला केबिन से कॉकपिट में अवैध प्रवेश का नहीं था। न तो यात्रियों ने जबरन कॉकपिट में घुसने की कोशिश की और न ही केबिन क्रू की ओर से ऐसी कोई स्थिति सामने आई। घटना का मूल हिस्सा कॉकपिट के भीतर हुआ था।

मित्तल ने दावा किया कि मौजूदा कॉकपिट सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही काफी मजबूत है। इसलिए सिर्फ इस घटना के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि कॉकपिट के दरवाजों या सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले की पूरी जांच के बाद ही घटना के सभी पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।