Thursday, May 28, 2026
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ईडी का बड़ा एक्शन: अवैध आईपीएल सट्टेबाजी रैकेट का भंडाफोड़, 13 लाख कैश और लग्जरी गाड़ियां जब्त

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नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) 2002 की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया। यह अभियान पूरी रात जारी रहा, और गुवाहाटी व तिनसुकिया (असम) के साथ-साथ नई दिल्ली में स्थित कई ठिकानों पर छापे मारे गए। ये तलाशी एक बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध आईपीएल क्रिकेट सट्टेबाजी रैकेट और उससे कमाए गए ‘अपराध से प्राप्त धन’ की लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में की गई थी।

ईडी ने गुवाहाटी के क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। यह एफआईआर दीपेश बजोरिया, रौनक बजोरिया, राजेश जैन और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, 1860 और असम गेम एंड बेटिंग एक्ट, 1970 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराधों के लिए दर्ज की गई थी।

इसके बाद 30 मार्च को ईसीआईआर में एक परिशिष्ट जोड़ा गया। इसमें तिनसुकिया पुलिस स्टेशन द्वारा विकास बेरिया, नितिन बेरिया, सुप्रित बिस्वास और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज की गई दो और एफआईआर को शामिल किया गया। ये एफआईआर एक-दूसरे से जुड़े सिंडिकेट द्वारा चलाए जा रहे इसी तरह के अवैध आईपीएल सट्टेबाजी अभियानों से संबंधित थीं।

जांच से पता चला है कि आरोपी व्यक्ति आईपीएल क्रिकेट मैचों पर एक सुव्यवस्थित, पदानुक्रमित और तकनीकी रूप से सक्षम अवैध सट्टेबाजी और जुआ रैकेट चला रहे थे। सट्टे की बोलियां मोबाइल फोन के जरिए मांगी व स्वीकार की जाती थीं और उनका निपटारा किया जाता था। इसके लिए व्हाट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और विदेशों में स्थित ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था।

सट्टेबाजी से प्राप्त धन नकद के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों (यूपीआई/बैंक ट्रांसफर) से प्राप्त और वितरित किया जाता था। इसके बाद, इस पैसे को गुवाहाटी, तिनसुकिया और दिल्ली में फैले परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के एक नेटवर्क के जरिए कई चरणों में घुमाया और छिपाकर रखा जाता था। फिर इसे ‘बेदाग संपत्ति’ के रूप में दिखाया जाता था।

यह तलाशी दीपेश बजोरिया, रौनक बजोरिया, राजेश जैन, विकास अग्रवाल, सुप्रित बिस्वास, विकास बेरिया, नितिन बेरिया और दुर्गा प्रसाद बेरिया के रिहायशी ठिकानों पर और गुवाहाटी में ‘रॉयसी’ (पहले ‘प्लेबॉय’) नाम से चल रहे एक व्यावसायिक ठिकाने पर की गई थी।

तलाशी अभियान के दौरान कई ऐसे सबूत मिले हैं, जो अपराध में शामिल होने की ओर इशारा करते हैं। ये सबूत ज्यादातर डिजिटल उपकरणों (जिनमें मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज मीडिया शामिल हैं) में मौजूद थे, जिनमें सट्टेबाजी के लेन-देन का रिकॉर्ड, सट्टेबाजों और सब-एजेंटों के साथ सांकेतिक बातचीत और अपराध से हासिल पैसों के लेन-देन के डिजिटल निशान शामिल हैं।

तलाशी वाली जगहों से 13 लाख रुपए की बेहिसाब नकद राशि भी मिली है, जिसे जब्त कर लिया गया है। तलाशी अभियान के दौरान तीन महंगी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं, जिनमें एक मर्सिडीज-बेंज कार, एक एमजी हेक्टर कार और एक टोयोटा फॉर्च्यूनर कार शामिल है। माना जा रहा है कि इन गाड़ियों को अपराध से हासिल पैसों से ही खरीदा गया था।

इसके अलावा, कई ऐसे बैंक खाते भी मिले हैं जिनका इस्तेमाल आईपीएल की अवैध सट्टेबाजी गतिविधियों में और अपराध से हासिल पैसों के लेन-देन के लिए किया जा रहा था। इन खातों को फ्रीज कर दिया गया है, ताकि इन पैसों का आगे कोई लेन-देन न हो सके या इन्हें कहीं और न भेजा जा सके। वहीं, आगे की जांच अभी जारी है।