नई दिल्ली, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। भीषण गर्मी में जब शरीर थकान और प्यास से बेहाल हो जाता है, तब पारंपरिक और पौष्टिक पेय की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस होती है। ऐसे में सत्तू का शरबत न सिर्फ प्यास बुझाता है, बल्कि शरीर को अंदर से ठंडक और ताजगी भी प्रदान करता है।
आयुर्वेद और आधुनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ दोनों ही सत्तू को गर्मियों के लिए बेहद फायदेमंद मानते हैं। सत्तू एक प्राचीन भारतीय आहार है, जो मुख्य रूप से चना, गेहूं या जौ को भूनकर पीसकर बनाया जाता है। गर्मी के मौसम में यह शरीर को ठंडक देने वाला प्राकृतिक पेय साबित होता है। सत्तू का शरबत न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि यह पोषण से भी भरपूर है।
आयुर्वेद के अनुसार, सत्तू शरीर को अंदर से ठंडक प्रदान करता है और गर्मी से होने वाली थकान, चिड़चिड़ापन और कमजोरी को दूर रखता है। गर्मियों में इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है, ब्लड शुगर नियंत्रित रहता है और वजन प्रबंधन में भी सहायता मिलती है। सत्तू फाइबर से भरपूर होने के कारण आंतों को स्वस्थ रखता है और एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।
सत्तू का शरबत बनाने का तरीका बहुत आसान है। इसमें नमक, नींबू, भुना जीरा पाउडर या गुड़ मिलाकर स्वाद के अनुसार तैयार किया जा सकता है। गर्मियों में यह ठंडा शरबत सुबह नाश्ते में या दोपहर में पिया जा सकता है। इसके अलावा सत्तू से लड्डू, पराठा और घोल भी बनाया जा सकता है। देश के कई हिस्सों जैसे झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों में सत्तू का रोजाना सेवन बहुत लोकप्रिय है। विशेषज्ञों की सलाह है कि गर्मी के मौसम में सिंथेटिक ड्रिंक्स की जगह घर का बना सत्तू का शरबत पीना सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट के अनुसार, सत्तू में फाइबर की मात्रा अधिक और ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इससे पाचन क्रिया सुधरती है, कब्ज की समस्या दूर होती है और कोलेस्ट्रॉल भी नियंत्रित रहता है। सत्तू प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम और अन्य जरूरी खनिजों से भरपूर होता है, जो पूरे दिन ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है। गर्मियों में ज्यादा पसीना आने से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है। सत्तू का शरबत न सिर्फ प्यास बुझाता है, बल्कि शरीर को जरूरी ऊर्जा भी देता है।

