ऑस्ट्रेलिया में डिप्थीरिया का प्रकोप, उत्तरी क्षेत्र से क्वींसलैंड और साउथ ऑस्ट्रेलिया तक फैला संक्रमण

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कैनबरा, 19 मई (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया के नॉर्दर्न टेरिटरी में डिप्थीरिया का फैलाव (आउटब्रेक) हाल के दशकों में देश का सबसे बड़ा मामला बन गया है। अब यह पड़ोसी राज्यों क्वींसलैंड और साउथ ऑस्ट्रेलिया तक भी फैल रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

नेशनल नोटिफिएबल डिजीज सर्विलांस सिस्टम के अनुसार, अब तक नॉर्दर्न टेरिटरी में 133 मामले सामने आ चुके हैं। इसके अलावा साउथ ऑस्ट्रेलिया में छह मामले और क्वींसलैंड में पांच तक मामले दर्ज किए गए हैं।

स्वास्थ्य मंत्री मार्क बटलर ने ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) को बताया कि यह आउटब्रेक ‘शायद पिछले कई दशकों में सबसे बड़ा’ है। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि अधिकारी डिप्थीरिया से जुड़ी एक संदिग्ध मौत की जांच कर रहे हैं।

यह फैलाव खासकर आदिवासी समुदायों को ज्यादा प्रभावित कर रहा है, विशेषकर दूर-दराज के इलाकों में। स्वास्थ्य अधिकारी अब एबोरिजिनल मेडिकल सेवाओं के साथ मिलकर टेस्टिंग और टीकाकरण बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।

डिप्थीरिया कभी बच्चों की मौत का बड़ा कारण हुआ करता था, लेकिन यह टीकाकरण से रोकी जा सकने वाली बीमारी है। हालांकि जब लोगों में इम्युनिटी (रोग-प्रतिरोधक क्षमता) कम हो जाती है, तो यह फिर से फैल सकती है। अधिकारियों ने अब जोखिम वाले वयस्कों के लिए बूस्टर डोज हर पांच साल में लेने की सलाह दी है, जबकि पहले यह अंतर दस साल का था।

स्थानीय स्वास्थ्य नेताओं के अनुसार, सेंट्रल ऑस्ट्रेलिया में अभी भी हजारों लोग अपने बूस्टर डोज लेने में पीछे हैं, हालांकि हाल के हफ्तों में टीकाकरण तेजी से बढ़ा है। एबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्दर्न टेरिटरी में हर हफ्ते लगभग 15 से 20 नए मामले सामने आ रहे हैं।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि अगर किसी में लक्षण दिखें जैसे गले में दर्द या त्वचा में संक्रमण तो तुरंत टेस्ट करवाएं, क्योंकि संक्रमण को रोकने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) के अनुसार, डिप्थीरिया एक संक्रामक बीमारी है जो जहर (टॉक्सिन) बनाने वाले बैक्टीरिया से होती है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तब फैल सकती है जब संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है। कुछ लोगों में इसके लक्षण नहीं दिखते, लेकिन वे फिर भी दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं। कई लोगों में हल्की बीमारी होती है, लेकिन गंभीर स्थिति, जटिलताएं और मौत भी हो सकती है।

डिप्थीरिया किसी को भी हो सकता है, लेकिन यह खासकर उन बच्चों में ज्यादा पाया जाता है जिनका टीकाकरण नहीं हुआ होता।

इस बीमारी में बनने वाला टॉक्सिन सांस की नली को नुकसान पहुंचाता है और शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी फैल सकता है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, गले में खराश और गर्दन की ग्रंथियों में सूजन शामिल हैं।

डिप्थीरिया से बचने और इसे दूसरों तक फैलने से रोकने का सबसे अच्छा तरीका टीकाकरण है। यह वैक्सीन सुरक्षित होती है और शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करती है।