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नंदीग्राम उपचुनाव : कलकत्ता हाई कोर्ट ने मिलन प्रधान के खिलाफ नई कार्रवाई पर लगाई रोक

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कोलकाता, 24 सितंबर (आईएएनएस)। कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल पुलिस को कांग्रेस के नंदीग्राम उपचुनाव के उम्मीदवार मिलन प्रधान के खिलाफ किसी भी नए मामले में केस दर्ज करने या आगे कोई कार्रवाई करने से रोक दिया।

मिलन प्रधान अभी पश्चिम बंगाल की जिला अदालतों के आदेशों के बाद दो मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं। 2007 के एक हत्या के मामले में उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। एक अन्य मामले में, अदालत ने उन्हें 5 अक्टूबर तक जेल भेज दिया।

गुरुवार को जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल-जज बेंच ने आदेश दिया कि जिन दो मामलों में प्रधान पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं, उनके अलावा राज्य पुलिस कोई नया मामला दर्ज नहीं कर सकती और न ही उन्हें किसी नए मामले में गिरफ्तार दिखा सकती है।

राज्य पुलिस पर यह रोक 12 अक्टूबर तक लागू रहेगी। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों के लिए उपचुनाव 6 अक्टूबर को होंगे और नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।

मिलन प्रधान को 18 सितंबर की शाम को गिरफ्तार किया गया। यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस ऐलान के कुछ घंटे बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी अगुवाई वाला तृणमूल कांग्रेस का गुट नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगा।

बनर्जी का ऐलान उनके गुट की उम्मीदवार संचिता डे प्रधान के नंदीग्राम से नामांकन अचानक वापस लेने के कुछ ही समय बाद आया। इस साल की शुरुआत में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद, विपक्ष की एकजुटता की दिशा में यह एक नया कदम था।

आगामी उपचुनाव के माहौल में यह कानूनी कार्रवाई हुई है, और अब नंदीग्राम के चुनावी मुकाबले में ये मामले और प्रधान की कस्टडी एक अहम मुद्दा बन गए हैं।

इस बीच, मिलन की पत्नी अर्पिता प्रधान ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो मैसेज पोस्ट करके अपने पति की गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए।

उन्होंने पूछा, “कांग्रेस द्वारा पार्टी उम्मीदवार के तौर पर उनके नाम की घोषणा किए जाने के तुरंत बाद मेरे पति को गिरफ्तार कर लिया गया। वे नियमित रूप से वोट देने जाते थे और त्योहारों के समय इलाके में ही रहते थे। इतने लंबे समय तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। अब, कांग्रेस द्वारा उन्हें उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया?”

राज्य सरकार का तर्क है कि उपचुनाव से पहले लंबे समय से लंबित सभी गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंटों को तामील करने के निर्देशों के बाद प्रधान को गिरफ्तार किया गया।