Sunday, June 14, 2026
SGSU Advertisement
Home अपराध श्रीनगर में कोर्ट का फैसला, नाबालिग बेटे को गाड़ी चलाने देने पर...

श्रीनगर में कोर्ट का फैसला, नाबालिग बेटे को गाड़ी चलाने देने पर पिता को तीन साल की सजा

0
2

श्रीनगर, 14 जून (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में कोर्ट ने एक पिता को अपने नाबालिग बेटे को गाड़ी चलाने की इजाजत देने के लिए दोषी ठहराया और तीन साल की सजा का प्रस्ताव दिया।

नरमी बरतने वाले कई पहलुओं पर विचार करते हुए आरोपी द्वारा अपना अपराध स्वीकार करने और केस न लड़ने के बाद कोर्ट ने उसे ‘प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट’ का लाभ दिया।

कश्मीर के श्रीनगर में स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट (ट्रैफिक) की कोर्ट ने सड़क सुरक्षा कानूनों को लागू करने के मकसद से अहम फैसले में एक गाड़ी के मालिक को नाबालिग से मोटर गाड़ी चलवाने की इजाजत देने के लिए दोषी ठहराया। उसे मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 199-ए और 180 के तहत दोषी माना गया।

केस रिकॉर्ड के मुताबिक, एक नाबालिग को गाड़ी चलाते हुए पाया गया था। यह गाड़ी श्रीनगर के फतेह कदल के रहने वाले हारून खान की थी। उन्होंने गाड़ी के मालिक होने की बात मानी और ट्रैफिक अधिकारियों द्वारा उनके खिलाफ चालान पेश किए जाने के बाद वकील के जरिए कोर्ट में पेश हुए।

कोर्ट ने पाया कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199-ए के तहत, जब कोई नाबालिग इस एक्ट के तहत कोई अपराध करता है तो गाड़ी के अभिभावक या मालिक को ही जिम्मेदार माना जाता है।

इस प्रावधान में सख्‍त सजा का भी प्रावधान है, जिसमें जेल की सजा, जुर्माना और गाड़ी का रजिस्ट्रेशन रद्द करना शामिल है।

कार्यवाही के दौरान आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया और ट्रायल की मांग नहीं की। उसका बयान दर्ज करने के बाद, कोर्ट ने उसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया और सजा सुनाई।

कोर्ट ने धारा 199-ए के तहत तीन साल की साधारण कैद और 25,000 रुपए जुर्माने का प्रस्ताव दिया, साथ ही मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 180 के तहत तीन महीने की साधारण कैद और 1,000 रुपए जुर्माने का प्रस्ताव दिया।

इसके अलावा, कोर्ट ने गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को एक साल के लिए रद्द करने का आदेश दिया और कहा कि दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।

हालांकि, यह देखते हुए कि अपराध में कोई अनैतिक कृत्य शामिल नहीं था, आरोपी को पहले कभी दोषी नहीं ठहराया गया था, और उसकी उम्र व पिछले रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने उसे ‘प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट’ का लाभ दिया।

आरोपी को दो साल तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने के लिए 2 लाख रुपए का बॉन्ड भरने का निर्देश दिया गया। अदालत ने चेतावनी दी कि बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने पर आरोपी को प्रस्तावित सजा भुगतनी होगी।

अदालत ने वाहन और उससे जुड़े दस्तावेजों को रजिस्टर्ड मालिक को सौंपने का भी आदेश दिया और स्पष्ट किया कि इस सजा के कारण सरकारी या निजी नौकरी, पासपोर्ट वेरिफिकेशन या इसी तरह के कामों के लिए कोई अयोग्यता नहीं मानी जाएगी।

यह फैसला कश्मीर, श्रीनगर के स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट (ट्रैफिक) शब्बीर अहमद मलिक ने सुनाया।