नई दिल्ली, 6 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली हाई कोर्ट ने संबंधित डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) को उन हालात की जांच करने का निर्देश दिया है, जिनमें एक जांच अधिकारी (आईओ) ने एक आरोपी की ‘तलाशी और गिरफ्तारी’ के लिए मुंबई जाने की इजाजत मांगी, जबकि उस आरोपी को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा मिली हुई थी।
जस्टिस प्रतीक जालान की सिंगल जज बेंच ने सुभाष प्लेस पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के मामले में अमित जैन की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया।
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में याचिकाकर्ता की बात दर्ज की कि उसने ‘सूचना का अधिकार’ (आरटीआई) कानून के तहत एक दस्तावेज हासिल किया है। इस दस्तावेज से पता चलता है कि जांच अधिकारी (आईओ) ने मौजूदा एफआईआर और एक अन्य आपराधिक मामले के संबंध में ‘जांच (आरोपी की तलाश और गिरफ्तारी) के उद्देश्य से’ मुंबई जाने के लिए अपने वरिष्ठ अधिकारी से इजाजत मांगी थी।
आवेदक के अनुसार, यह अनुरोध जांच अधिकारी (आईओ) ने किया था, जिसे स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) ने आगे बढ़ाया और संबंधित असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (एसीपी) ने 8 मई को मंजूरी दी। यह उस समय की बात है, जब सेशंस कोर्ट ने उसे गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी थी।
इस बात पर ध्यान देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने संबंधित डीसीपी को मामले की जांच करने का निर्देश दिया। जस्टिस जालान ने आदेश दिया, “इन हालात पर ध्यान देते हुए संबंधित डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस को निर्देश दिया जाता है कि वे मामले की जांच करें और इस कोर्ट में एक रिपोर्ट दाखिल करें। इस रिपोर्ट में उन हालात का जिक्र हो, जिनमें ऐसी स्थिति के बावजूद यह अनुरोध किया गया और उसे मंजूरी दी गई।”
दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेज में भी कमियां या विसंगतियां दिखाई दे रही हैं। आदेश में कहा गया, “इसमें साफ तौर पर गलतियां और विसंगतियां हैं, जिनमें उस स्थान के बारे में जानकारी भी शामिल है, जिसके लिए मंजूरी मांगी गई थी।”
सुनवाई के दौरान एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर मंजीत आर्या ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट से 14 मई को मिली अंतरिम सुरक्षा के तहत याचिकाकर्ता जांच में शामिल हुआ था, फिर भी उससे कुछ और दस्तावेजों की जरूरत थी।
इस बात को रिकॉर्ड पर लेते हुए जस्टिस जालान ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वे दो दिनों के भीतर आवेदक को जरूरी दस्तावेजों की सूची सौंपें। आवेदक के वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट को भरोसा दिलाया कि उनके पास मौजूद ऐसे कोई भी दस्तावेज जांच एजेंसी को सौंप दिए जाएंगे।
शिकायतकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट मनु शर्मा को भी सुनवाई की अगली तारीख से पहले रिकॉर्ड पर अतिरिक्त दस्तावेज रखने की इजाजत दी गई।
मामले को 14 जुलाई को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

