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ईडी की बड़ी कार्रवाई, 7 करोड़ रुपए के डिजिटल अरेस्ट मामले में कोलकाता से आरोपी गिरफ्तार

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कोलकाता, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को कोलकाता से एक साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी पंजाब के लुधियाना में एक नागरिक के साथ हुए 7 करोड़ रुपए के डिजिटल अरेस्ट मामले में की गई है, जिसमें गिरोह ने सीबीआई के अधिकारी और जज बनकर नागरिक को धमकाया था।

ईडी के जालंधर जोनल ऑफिस ने 28 सितंबर को पश्चिम बंगाल में तीन जगहों पर तलाशी अभियान चलाने के बाद सोहेल अख्तर उर्फ राजू को गिरफ्तार किया।

ईडी अधिकारी ने एक बयान में कहा कि ये छापे ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002’ के प्रावधानों के तहत मारे गए। ये छापे लुधियाना के रहने वाले एसपी ओसवाल के ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े मामले में मारे गए। अख्तर इस मामले में गिरफ्तार होने वाला तीसरा आरोपी है।

ईडी ने बताया कि बाकी दो आरोपियों- रूमी कलिता और अर्पित राठौर को 23 दिसंबर 2025 और 31 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था।

गिरफ्तारी के बाद अख्तर को जालंधर के अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश के सामने पेश किया गया, जिन्होंने उसे 6 अक्टूबर तक ईडी की कस्टडी में भेज दिया।

ईडी की जांच लुधियाना के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के तहत दर्ज एफआईआर के बाद शुरू हुई थी। जांच में इसी ग्रुप द्वारा किए गए ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े साइबर अपराध के नौ और मामले भी शामिल किए गए हैं।

ईडी ने बताया कि जांच से पता चला है कि ओसवाल के ‘डिजिटल अरेस्ट’ के दौरान धोखाधड़ी करने वालों ने सीबीआई और न्यायपालिका के अधिकारी बनकर पीड़ित से 7 करोड़ रुपए ऐंठ लिए।

ईडी ने कहा, “अपराध से मिली रकम शुरू में ‘रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स’ कंपनियों के बैंक खातों में जमा की गई थी। इन खातों को गुवाहाटी के आरोपी रूमी कलिता और कानपुर के अर्पित राठौर कंट्रोल करते थे।”

इसमें यह भी कहा गया है कि अपराध से मिली रकम को तेजी से इधर-उधर करने के लिए ‘एएमएम फॉरवर्ड’ नाम के एपीके एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया गया था।

ईडी ने बताया कि राठौर ने कंबोडिया और वियतनाम में रहने वाले लोगों के कई म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराए और अपने बिनेंस अकाउंट में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (क्रिप्टोकरेंसी) के रूप में कमीशन लिया।

ईडी की जांच से पता चला कि रिग्लो वेंचर्स के बैंक अकाउंट्स को अख्तर कंट्रोल और ऑपरेट करता था। वह लोगों और कंपनियों के लिए ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ का इंतजाम करने के लिए लोगों को भर्ती करने में मुख्य भूमिका निभाता था।

ईडी ने बताया कि रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और दूसरी कंपनियों के बैंक अकाउंट्स से जुड़े सिम कार्ड डालने के लिए ऐसे मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया गया, जिनमें पहले से एपीके फाइलें डाउनलोड की गई थीं।

इसके बाद इन मोबाइल फोन पर एपीके फाइलें एक्टिवेट की गईं, जिससे नेपाल में मौजूद विदेशी साथियों को अपने मोबाइल डिवाइस पर ओटीपी और दूसरे एसएमएस मैसेज मिल सके। ईडी ने कहा कि इस सिस्टम से अपराध से मिली रकम को इन बैंक अकाउंट्स के जरिए इधर-उधर भेजने में आसानी हुई।

जांच में यह भी पता चला कि अख्तर ने विदेश में रहने वाले लोगों को कई म्यूल बैंक अकाउंट्स उपलब्ध कराए और इसके बदले अपने या अपने साथियों के बिनेंस अकाउंट में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (क्रिप्टोकरेंसी) के रूप में कमीशन लिया।

ईडी ने बताया कि अपराध से मिली रकम को बाद में एक व्यवस्थित तरीके से कई म्यूल बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर किया गया, जिससे साइबर अपराध से मिली रकम को दूसरी जगह भेजने और छिपाने में मदद मिली।

ईडी ने कहा, “इन अकाउंट्स से गुजरने वाले पैसे का इस्तेमाल आगे साइबर अपराधों और फर्जी एंट्री के लिए किया गया। अपराध से मिली रकम को फर्जी कंपनियों के जरिए घुमाया गया और ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग के तरीकों से भारत के बाहर भेजा गया।”

ईडी ने बताया कि अपराध से मिली बाकी रकम को 2 से 5 लाख रुपए तक की छोटी-छोटी किश्तों में अलग-अलग म्यूल बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर किया गया और इन बैंक अकाउंट्स से तुरंत कैश निकाल लिया गया।

उसने कहा कि इस कैश का इस्तेमाल वर्चुअल डिजिटल एसेट्स खरीदने के लिए किया गया और कमीशन काटने के बाद ये वर्चुअल डिजिटल एसेट्स विदेशी नागरिकों के अकाउंट्स में जमा कर दिए गए।

बयान में कहा गया है कि ये म्यूल अकाउंट्स आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लोन दिलाने या नौकरी देने का झूठा वादा करके खुलवाए गए थे।

ईडी की जांच से यह भी पता चला है कि विदेश में मौजूद साथियों के साथ म्यूल बैंक अकाउंट की जानकारी शेयर करने के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड प्राइवेट मोबाइल मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल किया गया था।

ईडी की जांच के नतीजतन, अब तक 1.76 करोड़ रुपए की अपराध से हुई कमाई को लेकर 14 फरवरी 2026 को एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया गया है और 19 फरवरी को कलिता, राठौर, आनंद चौधरी, अतानु चौधरी और फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।