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बेंगलुरु: त्रैमासिक सम्मेलन में ईडी के अधिकारियों ने प्रौद्योगिकी के उपयोग और त्वरित सुनवाई पर जोर दिया

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बेंगलुरु, 15 सितंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने यहां आयोजित दो दिवसीय 36वें क्षेत्रीय अधिकारियों के त्रैमासिक सम्मेलन में प्रौद्योगिकी और फोरेंसिक क्षमताओं के व्यापक उपयोग, सुनवाई और दोषसिद्धि में तेजी लाने के लिए एक स्पष्ट कार्यसूची को अंतिम रूप दिया।

बेंगलुरु स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम-बी) में आयोजित यह सम्मेलन मंगलवार को समाप्त हुआ, जिसमें ईडी ने अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले कानूनों के निष्पक्ष प्रवर्तन और भारत की वित्तीय प्रणाली की अखंडता की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश में ईडी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 14-15 सितंबर को बेंगलुरु स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम-बी) में क्षेत्रीय अधिकारियों का अपना 36वां त्रैमासिक सम्मेलन (क्यूसीजेडओ) सफलतापूर्वक आयोजित किया, इससे पहले 13 सितंबर को आईआईएम-बी के संकाय सदस्यों द्वारा एक प्रबंधन और नेतृत्व कार्यशाला का आयोजन किया गया था।

बयान में आगे कहा गया कि सम्मेलन आगामी तिमाही के लिए एक स्पष्ट रोडमैप के साथ समाप्त हुआ, जिसमें कैडर पुनर्गठन का समयबद्ध कार्यान्वयन, प्रौद्योगिकी और फोरेंसिक क्षमताओं का पूर्ण उपयोग, मुकदमों और सजाओं में तेजी लाना और आर्थिक अपराध के पीड़ितों को निरंतर मुआवजा दिलाना शामिल है।

एक बयान में कहा गया कि कार्यशाला के सत्रों का संचालन आईआईएम-बी के संकाय सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा किया गया। इनमें भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के संदर्भ में वित्तीय जांच का भविष्य, आर्थिक अपराध जांच में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण का उपयोग, डीपफेक और एआई-सक्षम धोखाधड़ी से जुड़े जोखिम, साइबर खतरे और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों को शामिल किया गया।

बयान में आगे कहा गया कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास से संबद्ध संघीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के एक विशेष एजेंट के इनपुट ने चर्चाओं को और अधिक मूल्यवान बनाया।

बयान में यह भी कहा गया कि विश्व बैंक समूह की चोरी की संपत्ति वसूली पहल के माध्यम से ज्ञान साझा करते हुए संपत्ति का पता लगाने और उसकी वसूली जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

बयान में कहा गया कि सभी सत्रों में बार-बार सामने आने वाला विषय जांच के लिए मामले-केंद्रित दृष्टिकोण से पारिस्थितिकी तंत्र-केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ने, प्रौद्योगिकी और डेटा विश्लेषण का उपयोग करने के साथ-साथ उनसे जुड़े जोखिमों के प्रति सचेत रहने और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता थी।