पेरिस, 4 जुलाई (आईएएनएस)। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि फ्रांसीसी विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल अब मध्य पूर्व से अपने घरेलू बंदरगाह टूलॉन लौट रहा है।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, इस विमानवाहक पोत को फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में होर्मुज स्ट्रेट में प्रस्तावित बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा मिशन की तैयारी के लिए क्षेत्र में भेजा गया था।
मैक्रों ने अपने पोस्ट में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इसी वजह से फ्रांस ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी में बदलाव करने का फैसला किया है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि फ्रांस के बारूदी सुरंग हटाने वाले संसाधन और उनके सुरक्षा बेड़े वहीं तैनात रहेंगे और जरूरत पड़ने पर सहयोगी देशों के साथ अभियान चलाने के लिए तैयार रहेंगे।
फ्रांसीसी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति कार्यालय ने बताया है कि चार्ल्स डी गॉल फिलहाल भूमध्य सागर में मौजूद है।
फ्रांस और ब्रिटेन ने अप्रैल के मध्य में घोषणा की थी कि वे होर्मुज स्ट्रेट में बहुराष्ट्रीय सुरक्षा एस्कॉर्ट मिशन का नेतृत्व करेंगे। इसके बाद मई में फ्रांस ने इस अभियान की तैयारी के लिए चार्ल्स डी गॉल को मध्य पूर्व भेजा था, ताकि संघर्ष थमने के बाद मिशन को आधिकारिक रूप से शुरू किया जा सके।
अमेरिका और ईरान के बीच 14 जून को समझौता ज्ञापन पर सहमति बनी थी। इसके अगले दिन मैक्रों ने कहा था कि यदि हालात अनुकूल रहे तो चार्ल्स डी गॉल दो से तीन दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट पहुंचकर एस्कॉर्ट मिशन में शामिल हो सकता है।
उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत में “लगभग उन सभी बातों पर सहमत हो गया है, जिनकी अमेरिका को जरूरत थी।” हालांकि, उन्होंने दोहराया कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सीएनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भरोसा है कि बातचीत अमेरिका के पक्ष में आगे बढ़ रही है।
ट्रंप ने कहा, “बातचीत जारी है और आगे क्या होता है, यह देखा जाएगा। लेकिन मेरा मानना है कि वे हमारी लगभग सभी प्रमुख शर्तों पर सहमत हो चुके हैं।” उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान के खिलाफ पारंपरिक सैन्य अभियान चलाना नहीं, बल्कि उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना है।
ट्रंप ने कहा, “हमारा मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। उसे किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार नहीं मिलना चाहिए।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह तेहरान में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं, तो उन्होंने इससे इनकार करते हुए कहा, “मैं शासन बदलना नहीं चाहता। मेरी सिर्फ एक ही मांग है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।”
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनके दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों से ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हुई है।

